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त्वं सो॑म तनू॒कृद्भ्यो॒ द्वेषो॑भ्यो॒ऽन्यकृ॑तेभ्यः । उ॒रु य॒न्तासि॒ वरू॑थम् ॥

English Transliteration

tvaṁ soma tanūkṛdbhyo dveṣobhyo nyakṛtebhyaḥ | uru yantāsi varūtham ||

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Pad Path

त्वम् । सो॒म॒ । त॒नू॒कृत्ऽभ्यः॑ । द्वेषः॑ऽभ्यः । अ॒न्यऽकृ॑तेभ्यः । उ॒रु । य॒न्ता । अ॒सि॒ । वरू॑थम् ॥ ८.७९.३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:79» Mantra:3 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:33» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:3


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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे परमेश्वर ! (तव+इत्) तुम्हारी ही (आशसा) आशा से (अहम्) मैं (हस्ते) हाथ में (दात्रं+चन) काटने के लिये हसुआ आदि लेता हूँ। (मघवन्) हे सर्वधनसम्पन्न ! (दिनस्य+वा) प्रतिदिन (सम्भृतस्य) एकत्रित (यवस्य) जौ आदि खाद्य पदार्थों के (कासिना) मुष्टि से हमारे घर को भरो ॥१०॥
Connotation: - परमात्मा से हम मनुष्य उतने ही पदार्थ माँगें, जिनसे हम अपना निर्वाह अच्छी तरह कर सकें ॥१०॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

क्षीण करनेवाला द्वेष

Word-Meaning: - [१] हे (सोम) = सम्पूर्ण संसार को जन्म देनेवाले प्रभो ! (त्वम्) = आप (अन्यकृतेभ्यः) = दूसरों से हमारे अन्दर उत्पन्न किये गये (तनूकृद्भ्यः) = हमें क्षीण करनेवाले (द्वेषोभ्यः) = द्वेष के भावों से (उरु) = विशाल-महान् (वरूथम्) = रक्षक बल को (यन्तासि) = देनेवाले हैं। [२] प्रभु का स्मरण हमें द्वेष के भावों से दूर करता है। द्वेष हमें क्षीण करनेवाला है। प्रभु ही हमें इस द्वेष से अनाक्रान्त होने का सामर्थ्य प्राप्त कराते हैं।
Connotation: - भावार्थ - इस शरीर में सोम का रक्षण करें और प्रभु का स्मरण करें तो द्वेष से ऊपर उठ पाते हैं।
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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र=परमेश्वर ! तव+इत्=तवैव। आशसा=आशया। अहम्। हस्ते। दात्रं+चन=लवणसाधनं दात्रमपि। आददे=गृह्णामि। हे मघवन् ! दिनस्य वा संभृतस्य वा यवस्य कासिना मुष्टिना। पूर्धि=पूरय ॥१०॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - You, Soma, lead the good to extensive freedom and protection against waste and exploitation, jealousy and enmity, and the evil and suffering caused by others.