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नकी॒मिन्द्रो॒ निक॑र्तवे॒ न श॒क्रः परि॑शक्तवे । विश्वं॑ शृणोति॒ पश्य॑ति ॥

English Transliteration

nakīm indro nikartave na śakraḥ pariśaktave | viśvaṁ śṛṇoti paśyati ||

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Pad Path

नकी॑म् । इन्द्रः॑ । निऽक॑र्तवे । न । श॒क्रः । परि॑ऽशक्तवे । विश्व॑म् । शृ॒णो॒ति॒ । पश्य॑ति ॥ ८.७८.५

Rigveda » Mandal:8» Sukta:78» Mantra:5 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:31» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:5


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे ईश ! तू (नः) हम मनुष्यों को (व्यञ्जनम्) विविध शाक पत्र आदि (गाम्) गौ, मेष आदि पशु (अश्वम्) अश्व हाथी आदि वाहन और (अभ्यञ्जनम्) तेल आदि तथा (सचा) इन पदार्थों के साथ (मना) मननीय (हिरण्यया) सुवर्णमय उपकरण (आभर) दे ॥२॥
Connotation: - जो आवश्यक वस्तु हों, वे ही ईश्वर से माँगें ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

न निकर्तवे, न परिशक्तवे

Word-Meaning: - [१] (इन्द्रः) = वे परमैश्वर्यशाली प्रभु (निकर्तवे नकीम्) = निरादर व हिंसा के लिये नहीं होते- कोई भी प्रभु का निरादर व हिंसन नहीं कर सकता। (शक्रः) = वे सर्वशक्तिमान् प्रभु (परिशक्तवे न) = बल द्वारा पराजित करने योग्य नहीं होते। वे प्रभु सर्वाधिक ऐश्वर्यवाले व सर्वशक्तिमान् हैं। [२] वे प्रभु ही (विश्वं शृणोति) = सब को सुनते हैं सब की प्रार्थना को सुननेवाले वे प्रभु ही हैं और सब को वे ही (पश्यति) = देखते हैं [Look after ]- सब का वे ही पालन व पोषण करते हैं।
Connotation: - भावार्थ:- कोई भी प्रभु का हिंसन व निरादर नहीं कर सकता। प्रभु ही सब की प्रार्थना को सुनते हैं व सभी का पालन करते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे ईश ! त्वम्। नोऽस्मभ्यं व्यञ्जनम्। गाम्। अश्वम्। अभ्यञ्जनञ्च तैलादिकञ्च। आभर। सचा=तैः सह। मना=मननीयानि। हिरण्यया=हिरण्मयानि उपकरणानि च। आहर ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - No one can equal Indra in action, no one in power, he is the powerful, he hears and sees all that is and all that happens in the world.