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पु॒रो॒ळाशं॑ नो॒ अन्ध॑स॒ इन्द्र॑ स॒हस्र॒मा भ॑र । श॒ता च॑ शूर॒ गोना॑म् ॥

English Transliteration

puroḻāśaṁ no andhasa indra sahasram ā bhara | śatā ca śūra gonām ||

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Pad Path

पु॒रो॒ळाश॑म् । नः॒ । अन्ध॑सः । इन्द्र॑ । स॒हस्र॑म् । आ । भ॒र॒ । श॒ता । च॒ । शू॒र॒ । गोना॑म् ॥ ८.७८.१

Rigveda » Mandal:8» Sukta:78» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:31» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:1


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे राजन् ! (ते) तुमने (एता) मनुष्यों की इन व्यवहारसम्बन्धी वस्तुओं को (च्यौत्नानि) सुदृढ़ और नियमों से सुबद्ध (कृता) किया है (वर्षिष्ठानि) अतिशय उन्नत किया है और (परीणसा) और जो अनम्र दुष्कर और कठिन काम थे, उनको नम्र सुकर और ऋजु कर दिया है, क्योंकि तुम (हृदा) हृदय से (वीळु) स्थिर करके (अधारयः) उनको रखते हो अर्थात् यह अवश्यकर्त्तव्य है, ऐसा मन में स्थिर करके रखते हो ॥९॥
Connotation: - जो राजा मन में दृढ़ संकल्प रखता है, वह उत्तमोत्तम कार्य्य करके दिखलाता है ॥९॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

पुरोडाश+गोशत

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (नः) = हमारे लिये (अन्धसः) = अन्न के (सहस्त्रम्) = आनन्दमय [स+दृस्] (पुरोडाशम्) = [ oblation] हुत [पुरा-दाश्], अर्थात् पहले यज्ञ में देने को और फिर यज्ञशेष के रूप में सेवन को (आभर) = भरिये प्राप्त कराइये। हम सदा यज्ञशेष का सेवन करें। [२] हे (शूर) = शत्रुओं को शीर्ण करनेवाले प्रभो! आप हुतशेष को तो हमें प्राप्त कराइये ही । (च) = और (गोनां शता) = ज्ञान की वाणियों को भी सैकड़ों की संख्या में प्राप्त करानेवाले होइये।
Connotation: - भावार्थ- हम हुतशेष का सेवन करें-देकर बचे हुए को ही खाएँ। तथा अत्यन्त ज्ञान को प्राप्त करें।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे राजन् ! ते=त्वया। एता=एतानि=मनुष्याणां व्यावहारिकाणि वस्तूनि। च्यौत्नानि=सुदृढानि नियमसुबद्धानि। कृता=कृतानि। वर्षिष्ठानि=अतिशयेन प्रवृद्धानि कृतानि। पुनः। परीणसा=परितो न तानि कृतानि। यतस्त्वम्। हृदा। वीळु=स्थिराणि। अधारयः। इदमवश्यमेव कर्त्तव्यमिति हृदि धारयसि ॥९॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, lord ruler of life and the world, bring us a thousandfold gifts of delicious foods and soma drinks and, O lord potent and generous, bring us hundreds of cows and more of cattle wealth.