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मा न॑: समस्य दू॒ढ्य१॒॑: परि॑द्वेषसो अंह॒तिः । ऊ॒र्मिर्न नाव॒मा व॑धीत् ॥

English Transliteration

mā naḥ samasya dūḍhyaḥ paridveṣaso aṁhatiḥ | ūrmir na nāvam ā vadhīt ||

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Pad Path

मा । नः॒ । स॒म॒स्य॒ । दुः॒ऽध्यः॑ । परि॑ऽद्वेषसः । अं॒ह॒तिः । ऊ॒र्मिः । न । नाव॑म् । आ । व॒धी॒त् ॥ ८.७५.९

Rigveda » Mandal:8» Sukta:75» Mantra:9 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:25» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:9


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (विरूप) हे विविध रङ्गरूप भाषादियुक्त मानवगण ! तू (तस्मै) उस परमात्मा की (सुष्टुतिम्) शोभन स्तुति (नित्यया+वाचा) नित्य वेदरूप वाणी से (चोदय) करो, जो (नूनम्) अवश्य (अभिद्यवे) चारों और प्रकाशमान हो रहा है, जो (वृष्णे) आनन्द की वर्षा दे रहा है ॥६॥
Connotation: - जो परमेश्वर सर्वत्र प्रकृति के मध्य विराजमान हो रहा है, उसकी स्तुति प्रार्थना करो ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ऊर्मिः न नावम्

Word-Meaning: - [१] (नः) = हमें (परिद्वेषसः) = चारों ओर द्वेषवाले सबके साथ द्वेष करनेवाले (समस्य) = सब (दूढ्य:) = दुर्बुद्धि पुरुष के (अंहतिः) = पाप (मा आवधीत्) = मत नष्ट करनेवाले हों। हम भी द्वेष की वृत्ति में पड़कर दुर्बुद्धि न बन जाएँ। [२] ये द्वेष की भावनाएँ इसी प्रकार हमारा नाश करनेवाली होती हैं, (न) = जैसे (ऊर्मिः) = तरंग (नावम्) = नाव को ।
Connotation: - भावार्थ- द्वेष करनेवालों से भी हम द्वेष न करें। यह द्वेष हमारी शरीररूप नाव को भिन्न कर देगा। तब संसारसमुद्र को कैसे तैरेंगे ?

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे विरूप=विविधरूप मानवगण ! त्वम्। नित्यया=उत्पत्तिरहितया। वाचा=वेदवाण्या। तस्मै= परमात्मने। नूनम्=इदानीम्। सुष्टुतिम्=शोभनां स्तुतिम्। चोदय=प्रेरय। तस्मै कथंभूताय अभिद्यवे=अभितो द्योतमानाय=प्रकाशमानाय। पुनः। वृष्णे=आनन्दवर्षकाय ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Let not the malevolent tyranny of the jealous smite us like billows of the sea striking the ship.