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नम॑स्ते अग्न॒ ओज॑से गृ॒णन्ति॑ देव कृ॒ष्टय॑: । अमै॑र॒मित्र॑मर्दय ॥

English Transliteration

namas te agna ojase gṛṇanti deva kṛṣṭayaḥ | amair amitram ardaya ||

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Pad Path

नमः॑ । ते॒ । अ॒ग्ने॒ । ओज॑से । गृ॒णन्ति॑ । दे॒व॒ । कृ॒ष्टयः॑ । अमैः॑ । अ॒मित्र॑म् । अ॒र्द॒य॒ ॥ ८.७५.१०

Rigveda » Mandal:8» Sukta:75» Mantra:10 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:25» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:10


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे मनुष्यों ! हम सब (अपाकचक्षसः) सर्वद्रष्टा सर्वनियन्ता (अस्य+अग्नेः) इस सर्वाधार जगदीश की (सेनया) कृपा से (गोषु) गौओं के (कं+स्वित्) निखिल (पणिं) चोरादिक उपद्रवों को (स्तरामहे) पार उतरने में समर्थ होवें ॥७॥
Connotation: - जिस कारण परमात्मा सर्वद्रष्टा और सर्वशासक है, इस हेतु अपनी सम्पूर्ण वस्तु उसके निकट समर्पित करे और उसकी इच्छा पर अपना कल्याण छोड़े ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अमित्र-अर्दन

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = सब दोषों को दग्ध करनेवाले प्रभो! हे (देव) = सब शत्रुओं को जीतने की कामना करनेवाले प्रभो! (कृष्टयः) = श्रमशील व्यक्ति ही वस्तुतः (गृणन्ति) = आपका स्तवन करते हैं। स्तुति हमें पुरुषार्थवाला बनाती है। हम स्तुत्य के गुणों को धारण करने के लिए यत्नशील होते हैं। [२] हे प्रभो ! (अमैः) = बलों के द्वारा (अमित्रम्) = हमारे शत्रुभूत काम-क्रोध आदि को (अर्दय) = आप पीड़ित करके हमारे से दूर करिये। हमें शक्ति दीजिए कि हम काम-क्रोध आदि से ऊपर उठ पायें।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु के प्रति नमन व स्तवन से ओज को प्राप्त करके हम काम आदि शत्रुओं का संहार करें।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे मनुष्याः ! वयम्। अपाकचक्षसः=अनल्पदृष्टेः सर्वद्रष्टुरस्येश्वरस्य सेनया कृपया। गोषु=निमित्तेषु। कं+स्वित्=सर्वमेव। पणिं=चोरादिकम्। स्तरामहे=अभिभवेम ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Salutations to you, Agni, refulgent lord of generosity. The people too adore and exalt you. Pray ward off and throw out the enemies and unfriendly forces by your laws and powers.