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अ॒मृतं॑ जा॒तवे॑दसं ति॒रस्तमां॑सि दर्श॒तम् । घृ॒ताह॑वन॒मीड्य॑म् ॥

English Transliteration

amṛtaṁ jātavedasaṁ tiras tamāṁsi darśatam | ghṛtāhavanam īḍyam ||

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Pad Path

अ॒मृत॑म् । जा॒तऽवे॑दसम् । ति॒रः । तमां॑सि । द॒र्श॒तम् । घृ॒तऽआ॑हवनम् । ईड्य॑म् ॥ ८.७४.५

Rigveda » Mandal:8» Sukta:74» Mantra:5 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:21» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:5


SHIV SHANKAR SHARMA

उसका महत्त्व दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - (हविष्मन्तः) घृतादिसाधनसम्पन्न (जनासः) मनुष्य (प्रशस्तिभिः) उत्तमोत्तम विविध स्तोत्रों से (सर्पिरासुतिम्) घृतादि पदार्थों को उत्पन्न करनेवाले (यम्) जिस जगदीश की (मित्रम्+न) मित्र के समान (प्रशंसन्ति) प्रशंसा स्तुति और प्रार्थना करते हैं, उसकी हम भी पूजा करें ॥२॥
Connotation: - ईश्वर को निज मित्र जान उससे प्रेम करें और उसी की आज्ञा पर चलें ॥२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अमृतं तिरः तमांसि दर्शतम्

Word-Meaning: - [१] हम उन प्रभु को प्राप्त हों जो (अमृतं) = मृत्यु से परे हैं-सब रोगों से अतीत। (जातवेदसं) = सर्वज्ञ व सर्वैश्वर्यवाले हैं। (तमांसि तिरः) = सब अन्धकारों से परे हैं और (दर्शतम्) = दर्शनीय हैं। [२] उन प्रभु को प्राप्त हों, जो (घृताहवनम्) = मलक्षरण व ज्ञानदीप्ति के हेतु पुकारने योग्य हैं तथा (ईड्यम्) = स्तुत्य हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु अपने उपासक को नीरोग [अमृतं] ज्ञानी [जातवेदसं] अन्धकारों से परे व दर्शनीय जीवनवाला बनाते हैं। ये प्रभु ही स्तुत्य हैं। ये हमारे जीवनों में मलों को दूर करके हमें ज्ञानदीप्त जीवनवाला बनाते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

तस्य महत्त्वं दर्शयति।

Word-Meaning: - हविष्मन्तः=हविरादिसाधनसंपन्नाः। जनासः=जनाः। प्रशस्तिभिः। प्रस्तवैः। सर्पिरासुतम्=घृतक्षीरादिवस्तुजनकम्। मित्रं+न=मित्रमिव यमीशं प्रशंसन्ति ॥२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Let us rise and reach Agni, light of life, immortal, omnipresent, dispeller of darkness and ignorance, glorious, giver of delicious delicacies, and adorable.