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यं त्वा॒ जना॑स॒ ईळ॑ते स॒बाधो॒ वाज॑सातये । स बो॑धि वृत्र॒तूर्ये॑ ॥

English Transliteration

yaṁ tvā janāsa īḻate sabādho vājasātaye | sa bodhi vṛtratūrye ||

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Pad Path

यम् । त्वा॒ । जना॑सः । ईळ॑ते । स॒ऽबाधः॑ । वाज॑ऽसातये । सः । बो॒धि॒ । वृ॒त्र॒ऽतूर्ये॑ ॥ ८.७४.१२

Rigveda » Mandal:8» Sukta:74» Mantra:12 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:23» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:12


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे परमात्मन् ! आपकी कृपा से प्राप्त (सा) वह मति (द्युम्नैः) विज्ञानों से (द्युम्निनी) विज्ञानवती होवे तथा (श्रवसि) यशः कल्याणकारी (वृत्रतूर्ये) विघ्नविनाशक कार्य में (बृहत्) बहुत (श्रवः) यश (उपोप+दधीत) हम लोगों के समीप स्थापित करें ॥९॥
Connotation: - हे मनुष्यों ! ईश्वर से प्राप्त सुबुद्धि द्वारा हम लोग विज्ञान और यश प्राप्त करें, किसी को हानि न पहुँचावें ॥९॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वाजसातये

Word-Meaning: - [१] (सबाधः) = शत्रुओं के बाधन के साथ विद्यमान (जनासः) = लोग, अर्थात् काम, क्रोध, लोभ को जीतनेवाले लोग, हे प्रभो ! (यं त्वां) = जिन आपको (ईडते) = उपासित करते हैं। वे लोग (वाजसातये) = शक्ति को प्राप्त करने के लिए होते हैं। [२] हे प्रभो ! (सः) = वे आप (वृत्रतूर्ये) = वासना के संहार के निमित्त (बोधि) = हमें बोधवाला करिये ज्ञान देकर हमें वासनाविनाश के योग्य बनाइए ।
Connotation: - भावार्थ:- उपासक वही है जो काम-क्रोध आदि का संहार करता है। यह उपासक शक्ति को प्राप्त करता है। प्रभु इसे ज्ञानसम्पन्न करके वासना के विनाश के योग्य बनाते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - सा=तव कृपया प्राप्ता मतिः। द्युम्नैः=विज्ञानैः। द्युम्निनी=विज्ञानवती भवतु। तथा श्रवसि=कल्याणकारिणी। वृत्रतूर्ये=विघ्नविनाशककार्ये। बृहत्। श्रवः=यशः। उपोप+दधीत=अस्माकं समीपे दधातु ॥९॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, O lord of light, whom people adore for victory and advancement enthusiastically in spite of limitations, pray enlighten us in the programme of the elimination of evil and darkness from life.