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वि॒शोवि॑शो वो॒ अति॑थिं वाज॒यन्त॑: पुरुप्रि॒यम् । अ॒ग्निं वो॒ दुर्यं॒ वच॑: स्तु॒षे शू॒षस्य॒ मन्म॑भिः ॥

English Transliteration

viśo-viśo vo atithiṁ vājayantaḥ purupriyam | agniṁ vo duryaṁ vacaḥ stuṣe śūṣasya manmabhiḥ ||

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Pad Path

वि॒शःऽवि॑सः । वः॒ । अति॑थिम् । वा॒ज॒ऽयन्तः॑ । पु॒रु॒ऽप्रि॒यम् । अ॒ग्निम् । वः॒ । दुर्य॑म् । वचः॑ । स्तु॒षे । शू॒षस्य॑ । मन्म॑ऽभिः ॥ ८.७४.१

Rigveda » Mandal:8» Sukta:74» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:21» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:1


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे राजा अमात्य ! सृष्टि की विभूति देखिये। (उषाः) प्रातःकालरूपा देवी (ऋतावरी) परम सत्या है, समानकाल में वह सदा आती है। आलस्य कभी नहीं करती। पुनः (अरुणाप्सुः) वह शुभ्रवर्णा (अभूत्) हुई पुनः (ज्योतिः) प्रकाश (अकः) करती है। ऐसे पवित्र काल में आपकी ओर से रक्षा अवश्य होनी चाहिये ॥१६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

शूषस्य दुर्यम्

Word-Meaning: - [१] (वाजयन्तः) = शक्ति को प्राप्त करने की कामनावाले लोग उस प्रभु के (मन्मभिः) = मननीय स्तोत्रों के हेतु से (वचः स्तुषे) = स्तुतिवचनों का उच्चारण करते हैं। जो प्रभु (वः) = तुम (विशः विशः) = प्रजाओं के (अतिथिं) = अतिथि हैं- निरन्तर प्राप्त होनेवाले हैं। (पुरुप्रियम्) = पालक व पूरक हैं तथा पालन व पूरण के द्वारा प्रीणन करनेवाले हैं। [२] उस प्रभु का स्तवन करते हैं, जो (वः अग्निं) = तुम सबके अग्रणी हैं-आगे ले चलनेवाले हैं तथा (शूषस्य दुर्यम्) = सुख व बल के गृह हैं। प्रभु अपने उपासक को शक्ति प्राप्त कराते हैं। इस शक्ति के द्वारा उसका जीवन सुखी होता है। [३] मननपूर्वक प्रभु का स्तवन करते हुए हम भी उन्हीं गुणों को धारण करनेवाले बनते हैं।
Connotation: - भावार्थ- मननपूर्वक प्रभु का स्तवन करते हुए हम भी शक्तिशाली बनें। यही सुख- प्राप्ति का मार्ग है।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे राजामात्यौ ! दृश्यतां सृष्टेर्विभूतिः कार्य्यपरायणता चेति शिक्षते। यथा−उषा ऋतावरी=परमसत्यास्ति। समानकाले सदाऽऽगच्छति। नालस्यं कदापि विदधाति। पुनः। अरुणाप्सुः=शुभवर्णा अभूत्। पुनश्च। ज्योतिः=प्रकाशञ्च। अकः=करोति। ईदृशे काले युवयो रक्षयाऽवश्यं भाव्यम् ॥१६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O people of the world, seekers of light and advancement by every community for every community, for the sake of you all, with sincere thoughts and resounding words, I adore Agni, holy power, your homely friend loved by all for the common good.