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मा नो॒ गव्ये॑भि॒रश्व्यै॑: स॒हस्रे॑भि॒रति॑ ख्यतम् । अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ॥

English Transliteration

mā no gavyebhir aśvyaiḥ sahasrebhir ati khyatam | anti ṣad bhūtu vām avaḥ ||

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Pad Path

मा । नः॒ । गव्ये॑भिः । अश्व्यैः॑ । स॒हस्रे॑भिः । अति॑ । ख्य॒त॒म् । अन्ति॑ । सत् । भू॒तु॒ । वा॒म् । अवः॑ ॥ ८.७३.१५

Rigveda » Mandal:8» Sukta:73» Mantra:15 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:20» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:15


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - राजा को उचित है कि सर्व प्रजाओं में समान बुद्धि करे। समान बन्धुत्व दिखलावे। स्वयं राजा भी प्रजाओं के समान ही है। वह राजा कोई अविज्ञात ईश्वरप्रेरित देव है और इतर जन मर्त्य हैं, यह नहीं जानना चाहिये। किन्तु सब ही अल्पज्ञ विविध दोष दूषित, कामादिकों के वशीभूत राजा और इतर जन समान ही हैं, यही इससे दिखलाया गया है। यथा (वाम्) आप दोनों राजा और अमात्य का प्रजाओं के साथ (समानम्) समान ही (सजात्यम्) सजातित्व है, अतः आप गर्व मत करें। आप प्रजाओं के रक्षण में दासवत् नियुक्त हैं। पुनः सब ही जन आपके (समानः+बन्धुः) समान ही बन्धु हैं। अतः प्रजाओं का हित सदा करो ॥१२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

निर्दोष इन्द्रियाँ

Word-Meaning: - [१] हे प्राणापानो! आप (नः) = हमें (सहस्त्रेभिः) = प्रसन्न - पूर्ण विकासवाले (गव्येभिः) = ज्ञानेन्द्रियसमूहों से तथा (अश्व्यैः) = कर्मेन्द्रियसमूहों से (मा अतिख्यतम्) = निवारित मत करो मत वञ्चित करो। प्राणसाधना के द्वारा हमें अवश्य उत्तम ज्ञानेन्द्रियाँ व कर्मेन्द्रियाँ प्राप्त हों। [२] हे प्राणापानो! (वाम्) = आपका (अवः) = रक्षण (सत्) = उत्तम है। यह हमें (अन्ति भूतु) = समीपता से प्राप्त हो ।
Connotation: - भावार्थ- प्राणसाधना से इन्द्रियाँ निर्दोष न बनें ऐसा नहीं होता।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - सर्वासु प्रजासु राजा समानं बुद्धिं कुर्यात्। समानबन्धुत्वं दर्शयेत्। स्वयं राजाऽपि प्रजाभिः समानोऽस्ति। स कश्चिदविज्ञात ईश्वरप्रेरितो देवोऽस्ति। इतरे जना मर्त्याः सन्तीति न विज्ञातव्यम्। किन्तु सर्वे अल्पज्ञा विविधदोषदूषिता कामादिवशीभूता राजानः प्रजाश्च समानाः तव सन्ति। इदमेव दर्शयति−अश्विनौ ! वां=युवयो राजामात्ययोः। प्रजाभिः सार्धम्। समानं=तुल्यमेव। सजात्यं=समानजातित्वं वर्त्तते। अतो युवां गर्वं मा कार्षिष्टम्। प्रजारक्षणे युवां नियुक्तौ स्थः। पुनः। सर्वोऽपि जनः युवयोः समानो बन्धुभ्राताऽस्ति। अतः प्रजानां हितं सदा चरतम् ॥१२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - With all the thousandfold wealth of lands and cows and horses and achievements, pray do not leave us, do not forsake us. Let your protections and promotions ever remain with us at the closest.