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इ॒हा ग॑तं वृषण्वसू शृणु॒तं म॑ इ॒मं हव॑म् । अन्ति॒ षद्भू॑तु वा॒मव॑: ॥

English Transliteration

ihā gataṁ vṛṣaṇvasū śṛṇutam ma imaṁ havam | anti ṣad bhūtu vām avaḥ ||

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Pad Path

इ॒ह । आ । ग॒त॒म् । वृ॒ष॒ण्ऽव॒सू॒ इति॑ वृषण्ऽवसू । शृ॒णु॒तम् । मे॒ । इ॒मम् । हव॑म् । अन्ति॑ । सत् । भू॒तु॒ । वा॒म् । अवः॑ ॥ ८.७३.१०

Rigveda » Mandal:8» Sukta:73» Mantra:10 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:19» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:10


SHIV SHANKAR SHARMA

फिर उसी अर्थ को कहते हैं।

Word-Meaning: - तृतीय कर्त्तव्य का उपदेश देते हैं। (अश्विना) हे राजा अमात्य ! (युवम्) आप दोनों (अत्रये) मातृपितृभ्रातृविहीन जनसमुदाय के लिये (अवन्तम्) सर्वप्रकार से रक्षक (गृहम्) गृह को (कृणुतम्) बनवावें। जिस गृह में पोषण के लिये अन्नपान और विद्यादि का अभ्यास हो ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वृषण्वसू [अश्विना]

Word-Meaning: - [१] हे (वृषण्वसू) = सुखसेचक स्वास्थ्य आदि धनों को प्राप्त करानेवाले प्राणापानो! आप (इह आगतम्) = मेरे इस जीवन में प्राप्त होओ। मैं इस जीवन में आपकी साधना करनेवाला बनकर उत्तम स्वास्थ्यधन को प्राप्त करूँ। [२] हे प्राणापानो! (मे) = मेरे लिए (इमं) = इस (हवं शृणुतम्) = प्रभु की पुकार को सुनो। [३] (वाम्) = आपका (अवः) = रक्षण (सत्) = उत्तम है। यह (अन्ति भूतु) = मुझे समीपता से प्राप्त हो।
Connotation: - भावार्थ- प्राणसाधना [१] स्वास्थ्य आदि धनों को प्राप्त कराके सुखों का सेचन करती है। [२] हमें प्रभु की पुकार को सुनने के योग्य बनाती है।

SHIV SHANKAR SHARMA

पुनस्तमर्थमाह।

Word-Meaning: - तृतीयं कर्तव्यमुपदिशति, यथा−हे अश्विना=अश्विनौ ! युवं=युवामुभौ। अत्रये=मातृपितृभ्रातृविहीनाय जनसमुदायाय। अवन्तं=सर्वप्रकारै रक्षकं गृहम्। कृणुतं=कुरुतम्। अन्ति० ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O harbingers of the showers of wealth, honour and excellence, pray come here and listen to my call and adoration. Let your protections and exhortations be with us at the closest in the heart.