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नि ति॒ग्मम॒भ्यं१॒॑शुं सीद॒द्धोता॑ म॒नावधि॑ । जु॒षा॒णो अ॑स्य स॒ख्यम् ॥
English Transliteration
Mantra Audio
ni tigmam abhy aṁśuṁ sīdad dhotā manāv adhi | juṣāṇo asya sakhyam ||
Pad Path
नि । ति॒ग्मम् । अ॒भि । अं॒शुम् । सीद॑त् । होता॑ । म॒नौ । अधि॑ । जु॒षा॒णः । अ॒स्य॒ । स॒ख्यम् ॥ ८.७२.२
Rigveda » Mandal:8» Sukta:72» Mantra:2
| Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:14» Mantra:2
| Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:2
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - हे विद्वन् ! (अवसे) अपनी रक्षा और साहाय्य के लिये (गाथाभिः) स्तुतियों के द्वारा (अग्निम्) सर्वाधार परमात्मा की (ईळिष्व) स्तुति करो, (शीरशोचिषम्) जिसका तेज सर्वत्र व्याप्त है। (पुरुमीळ्ह) हे बहुतों को सन्तोषप्रद विद्वन् ! (राये) समस्त सुख की प्राप्ति के लिये (अग्निम्) ईश्वर की स्तुति करो। (नरः) इतर जन भी (श्रुतम्) सर्वत्र विख्यात (अग्निम्) उस परमात्मा की स्तुति करें, जो (सुदीतये) प्राणिमात्र को (छर्दिः) निवास देता है ॥१४॥
Connotation: - जो ईश्वर प्राणिमात्र को निवास और भोजन दे रहा है, उसकी स्तुति प्रार्थना हम मनुष्य करें ॥१४॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
होतृत्व व प्रभु की मित्रता
Word-Meaning: - [१] यह (होता) = यज्ञशील पुरुष (तिग्मं अंशुम् अभि) = अग्नि की तेज़ दीप्ति [ ज्वाला] के सामने (मनौ अधि) = उस ज्ञानपुञ्ज प्रभु के अधिष्ठतृत्व में (निसीदत्) = आसीन होता है। प्रभुस्मरण करता हुआ यज्ञ को करता है। [२] यह होता (अस्य) = इस प्रभु की (सख्यम्) = मित्रता का (जुषाण:) = प्रीतिपूर्वक सेवन करता है। यज्ञ के द्वारा ही तो हम प्रभु के प्रिय बन पाते हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रभु का उपासन करते हुए अग्नि में आहुति देनेवाले बनें। यह होता बनना ही हमें प्रभु का प्रिय बनाएगा।
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - हे विद्वन् ! अवसे=साहाय्यार्थम्। गाथाभिः=स्तुतिभिः। अग्निमीळिष्व। स्तुहि। कीदृशम्। शीरशोचिषम्= व्याप्ततेजस्कम्। हे पुरुमीळ्ह=बहुसन्तोषवर्षिन् विद्वन् ! राये। अग्निमीळिष्व। अन्येऽपि नरः=नराः। श्रुतं=प्रसिद्धमग्निम्। स्तुवन्तः। सुदीतये=जनाय। छर्दिर्गृहं ददातु ॥१४॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Let the hota, offerer of oblations, come and sit close to the fire in bright flames, loving and honouring at heart the friendship of this Agni.
