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अ॒ग्निमी॑ळि॒ष्वाव॑से॒ गाथा॑भिः शी॒रशो॑चिषम् । अ॒ग्निं रा॒ये पु॑रुमीळ्ह श्रु॒तं नरो॒ऽग्निं सु॑दी॒तये॑ छ॒र्दिः ॥

English Transliteration

agnim īḻiṣvāvase gāthābhiḥ śīraśociṣam | agniṁ rāye purumīḻha śrutaṁ naro gniṁ sudītaye chardiḥ ||

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Pad Path

अ॒ग्निम् । ई॒ळि॒ष्व॒ । अव॑से । गाथा॑भिः । शी॒रऽशो॑चिषम् । अ॒ग्निम् । रा॒ये । पु॒रु॒ऽमी॒ळ्ह॒ । श्रु॒तम् । नरः॑ । अ॒ग्निम् । सु॒ऽदी॒तये॑ । छ॒र्धिः ॥ ८.७१.१४

Rigveda » Mandal:8» Sukta:71» Mantra:14 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:13» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:14


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (सहसः) इस जगत् का (सूनुम्) उत्पादक (जातवेदसम्) सर्वज्ञ (अग्निम्) और सर्वाधार सर्वव्यापी ईश की ओर हम लोगों की स्तुति प्रार्थना जाएँ, जिससे कि (वार्य्याणां+दानाय) उत्तमोत्तम सुखप्रद सम्पत्तियों का दान प्राप्त हो और (यः) जो (द्विता) दो प्रकार से भासित होता है। सूर्य्य, चन्द्र, पृथिवी आदि देवों में वह (अमृतः) अमृतरूप होकर व्याप्त है (मर्त्येषु+आ) और मनुष्यों में (होता) दानदाता और (विशि) गृह-गृह में (मन्द्रतमः) अतिशय आनन्दप्रद हो रहा है ॥११॥
Connotation: - यद्यपि वह स्वयं कर्मानुसार आनन्द दे रहा है, तथापि अपनी-अपनी इच्छापूर्त्ति के लिये उसकी प्रार्थना प्रतिदिन करे ॥११॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सुदीतये छर्दिः

Word-Meaning: - [१] (अग्निम्) = उस अग्रणी प्रभु को (अवसे) = रक्षण के लिए (गाथाभिः) = स्तुतिवाणियों के द्वारा (ईडिष्व) = उपासित कर । हे (पुरुमीढ) = खूब ही शक्ति का अपने में सेचन करनेवाले उपासक ! तू (राये) = ऐश्वर्य प्राप्ति के लिए (शीरशोचिषं) = शत्रुओं को शीर्ण करनेवाली ज्ञानदीप्तिवाले (श्रुतं) = उस प्रसिद्ध (अग्निम्) = अग्रणी प्रभु को उपासित कर । [२] हे (नरः) = मनुष्यो ! (अग्निः) = ये अग्रणी प्रभु (सुदीतये) = उत्तम दीप्तिवाले नर के लिए खूब ज्ञान को प्राप्त करनेवाले मनुष्य के लिए (छर्दिः) = शरणस्थान व गृह हैं। सुदीति को वे प्रभु शरण देनेवाले हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम स्तुतिवाणियों से प्रभु का अर्चन करें। प्रभु ही हमें ऐश्वर्य प्राप्त कराते हैं। प्रभु ही ज्ञानदीप्तिवाले के लिए शरणस्थान हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे मनुष्याः ! सहसः=जगतः। सूनुं=जनयितारम्। जातवेदसम्=जातं जातं वेत्तीति=सर्वज्ञमित्यर्थः। ईदृशमिममग्निम्। वार्य्याणां=वरणीयानां धनानाम्। दानाय। अस्माकं गिरो यन्त्विति अनुवर्तते। यश्च। द्विता=द्विप्रकारोऽभूद्=दृश्यते। एकस्तु अमृतः। आ=पुनः। मर्त्येषु। होता। विशि। मन्द्रतमः=अतिशयेन आनन्दयिता ॥११॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Pray to Agni of bright flames with songs and praise for protection and progress. O generous scholar, study and serve Agni for wealth, famous among people, Agni who provides home and happiness for the man of brilliance.