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सखा॑य॒: क्रतु॑मिच्छत क॒था रा॑धाम श॒रस्य॑ । उप॑स्तुतिं भो॒जः सू॒रिर्यो अह्र॑यः ॥

English Transliteration

sakhāyaḥ kratum icchata kathā rādhāma śarasya | upastutim bhojaḥ sūrir yo ahrayaḥ ||

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Pad Path

सखा॑यः । क्रतु॑म् । इ॒च्छ॒त॒ । क॒था । रा॒धा॒म॒ । श॒रस्य॑ । उप॑ऽस्तुतिम् । भो॒जः । सू॒रिः । यः । अह्र॑यः ॥ ८.७०.१३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:70» Mantra:13 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:10» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:8» Mantra:13


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे इन्द्र ! जिस कारण (त्वम्) तू (ऋतयुः) सत्यप्रिय और सत्यकामी है, अतः (त्वानिदः) नास्तिक, चोर, डाकू आदि दुष्ट की अपेक्षा (नः+नि+तृम्पसि) हमको अतिशय तृप्त करता है। (तुविनृम्ण) हे समस्त धनशाली इन्द्र ! (ऊर्वोः) द्युलोक और पृथिवीलोक के (मध्ये) मध्य हम लोगों को सुख से (वसिष्व) बसा और (दासम्) दुष्ट को (हथैः) हननास्त्र से (नि+शिश्नथः) हनन कर ॥१०॥
Connotation: - जिस कारण ईश्वर सत्यप्रिय है, अतः असत्यवादी और उपद्रवियों को दण्ड देता है और सत्यवादियों को दान। अतः हे मनुष्यों ! सत्यप्रिय बनो ॥१०॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'भोजः सूरिः अह्रयः ' प्रभु

Word-Meaning: - [१] हे (सखायः) = मित्रो ! (क्रतुं) = यज्ञ, शक्ति व प्रज्ञान की (इच्छत) = कामना करो। (कथा) = किसप्रकार हम (शरस्य) = शत्रुओं को शीर्ण करनेवाले प्रभु की (उपस्तुतिं राधाम) = आराधना कर सकें। यज्ञों के द्वारा ही तो प्रभु का पूजन होगा। प्रज्ञान से व शक्ति के सम्पादन से ही तो हम प्रभु के प्रिय बन पाएँगे। [२] वे प्रभु (भोजः) = सबका पालन करनेवाले हैं। (सूरि:) = सबको प्रेरणा देनेवाले हैं [षू प्रेरणे] । (यः) = जो प्रभु (अह्वयः) = अतिशयेन बुद्धिमान् हैं अथवा शुद्ध होने से लज्जाशून्य हैं।
Connotation: - भावार्थ-वे प्रभु पालन करनेवाले, प्रेरणा देनेवाले व अतिशयेन बुद्धिमान् हैं। इस प्रभु का हम 'यज्ञों, शक्तियों व प्रज्ञानों' के द्वारा आराधन करें।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! यतस्त्वम्। ऋतयुः=सत्यकामोऽसि। अतः। त्वानिदः=तव निन्दकात् पुरुषात् सकाशात्। नोऽस्मान्। नि=नितराम्। तृम्पसि=तर्पयसि। स्वनिन्दकान् विनाशयसि अस्मांस्तु पालयसीत्यर्थः। हे तुविनृम्ण=बहुधन ! ऊर्वोः=द्यावापृथिवीरूपयोः जङ्घयोः मध्ये अस्मान्। वसिष्व=सुखेन वासय। दासञ्च। हथैः=हननास्त्रैः। नि+शिश्नथः=दूरी कुरु ॥१०॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O friends, try freely to do good by way of yajna, else how shall we serve Indra, lord of the bow and arrow, with worship and adoration? He is the great benefactor and ruler, light giver, abundant and gracious.