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अर्च॑त॒ प्रार्च॑त॒ प्रिय॑मेधासो॒ अर्च॑त । अर्च॑न्तु पुत्र॒का उ॒त पुरं॒ न धृ॒ष्ण्व॑र्चत ॥

English Transliteration

arcata prārcata priyamedhāso arcata | arcantu putrakā uta puraṁ na dhṛṣṇv arcata ||

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Pad Path

अर्च॑त । प्र । अ॒र्च॒त॒ । प्रिय॑ऽमेधासः । अर्च॑त । अर्च॑न्तु । पु॒त्र॒काः । उ॒त । पुर॑म् । न । धृ॒ष्णु । अ॒र्च॒त॒ ॥ ८.६९.८

Rigveda » Mandal:8» Sukta:69» Mantra:8 | Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:6» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:8


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - उस इन्द्रवाच्य परमात्मा ने (अधि+बर्हिषि) इस निराधार आकाश में (अरुषीः) प्रकाशमान इन (हरयः) परस्पर हरणशील पृथिव्यादि लोकों को (ससृज्रिरे) बनाया है, (यत्र) जहाँ हम लोग (संनवामहे) निवास करते हैं ॥५॥
Connotation: - बर्हिष् यह आकाश का नाम है, निघण्टु १।३। इससे ईश्वर की महती शक्ति दिखलाई गई है ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रियमेधों द्वारा प्रभु का पूजन

Word-Meaning: - [१] (अर्चत) = उस प्रभु का पूजन करो, (प्रार्चत) = खूब ही पूजन करो। (प्रियमेधासः) = हे यज्ञप्रिय [मेध=यज्ञ] लोगो! इन यज्ञों के द्वारा उस प्रभु का (अर्चत) = पूजन करो। [२] (उत) = और (पुत्रकाः) = [पुनाति त्रायते] अपने जीवन को पवित्र बनानेवाले व अपना ऋण करनेवाले (अर्चन्तु) = पूजन उस प्रभु का (अर्चत) = पूजन करो, जो (पुरं न) = पालन व पूरण करनेवाले के समान हैं, तथा (धृष्णु) = शत्रुओं का धर्षण करनेवाले हैं।
Connotation: - भावार्थ- वे प्रभु हमारा पालन व पूरण करनेवाले हैं, हमारे शत्रुओं का घर्षण करनेवाले हैं। उस प्रभु का यज्ञों के द्वारा हम पूजन करें।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - तेनेन्द्रेण। अधि+बर्हिषि=आकाशे निराधारे स्थाने। अरुषीः=आरोचमानाः। इमे। हरयः=परस्परहरणशीलाः पृथिव्यादिलोकाः। आ+ससृज्रिरे=आसृष्टाः। यत्र लोकेषु। वयमुपासकाः। अभि+संनवामहे=सर्वतो निवसामः ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - O lovers of Yajna, lovers of union and communion with the divine, adore and worship Indra, adore and worship again, worship again and again. Worship along with your children and grand children, just as the citizens adore and exalt a great city and the glorious ruler of the celestial city.