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अ॒भिष्ट॑ये स॒दावृ॑धं॒ स्व॑र्मीळ्हेषु॒ यं नर॑: । नाना॒ हव॑न्त ऊ॒तये॑ ॥
English Transliteration
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abhiṣṭaye sadāvṛdhaṁ svarmīḻheṣu yaṁ naraḥ | nānā havanta ūtaye ||
Pad Path
अ॒भिष्ट॑ये । स॒दाऽवृ॑धम् । स्वः॒ऽमीळ्हेषु । यम् । नरः॑ । नाना॑ । हव॑न्ते । ऊ॒तये॑ ॥ ८.६८.५
Rigveda » Mandal:8» Sukta:68» Mantra:5
| Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:1» Mantra:5
| Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:5
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - (तुविशुष्म) हे सर्वशक्ते (तुविक्रतो) हे सर्वज्ञ (शचीवः) हे अनन्तकर्मन् (मते) हे ज्ञानरूप देव ! तू (विश्वया) समस्तव्यापी (महित्वना) निज महत्त्व से (आ+पप्राथ) सर्वत्र पूर्ण है ॥२॥
Connotation: - तुवि=बहुत। १−उरु २−तुवि ३−पुरु ४−भूरि ५−शश्वत् ६−विश्व ७−परीणसा ८−व्यानशि ९−शत १०−सहस्र ११−सलिल और १२−कुवित् ये १२ (द्वादश) बहुनाम हैं। निघण्टु ३।१। शुष्म=बल। शची=कर्म। निघण्टु देखो। हे मनुष्यों ! जिसके बल, प्रज्ञा और कर्म अनन्त-अनन्त हैं, जो स्वयं ज्ञानरूप से सर्वत्र व्याप्त है, वही सबका पूज्य है ॥२॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
अभिष्टये-ऊतये
Word-Meaning: - [१] गतमन्त्र के अनुसार मैं उस प्रभु को पुकारता हूँ (यं) = जिस (सदावृध) = सदा से बढ़े हुए तथा उपासकों को बढ़ानेवाले प्रभु को (नरः) = उन्नतिपथ पर चलनेवाले मनुष्य (अभिष्टये) = इष्ट प्राप्ति के लिए (हवन्ते) = पुकारते हैं। [२] इस प्रभु को ही (स्वर्मीढेषु) = स्वर्ग के साधनभूत संग्रामों में (ऊतये) = रक्षण के लिए (नाना) = पृथक्-पृथक् क्षेत्रों में स्थित लोग नाना प्रकार से (हवन्ते) = पुकारते हैं।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु ही हमारी इष्टप्राप्ति के लिए होते हैं। प्रभु ही संग्रामों में हमें विजयी बनाते हैं।
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - हे तुविशुष्म=बहुबल ! हे तुविक्रतो=बहुज्ञान ! हे शचीवः=शचीवन्=अनन्तकर्मन् ! हे मते=ज्ञानरूपदेव ! त्वम्। विश्वया=विश्वव्याप्तेन। महित्वना=महत्त्वेन। सर्वत्र आपप्राथ=आपूर्णोऽस्ति ॥२॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - I pray to Indra, ever more munificent in human struggles for light, happiness and welfare, whom people invoke and adore in many ways for protection and progress and for the fulfilment of their cherished objects and ambitions.
