Viewed 392 times
ऐषु॑ चेत॒द्वृष॑ण्वत्य॒न्तॠ॒ज्रेष्वरु॑षी । स्व॒भी॒शुः कशा॑वती ॥
English Transliteration
Mantra Audio
aiṣu cetad vṛṣaṇvaty antar ṛjreṣv aruṣī | svabhīśuḥ kaśāvatī ||
Pad Path
आ । एषु॑ । चे॒त॒त् । वृष॑ण्ऽवती । अ॒न्तः । ऋ॒ज्रेषु॑ । अरु॑षी । सु॒ऽअ॒भी॒शुः । कशा॑ऽवती ॥ ८.६८.१८
Rigveda » Mandal:8» Sukta:68» Mantra:18
| Ashtak:6» Adhyay:5» Varga:4» Mantra:3
| Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:18
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - मैं उपासक (इन्द्रोते) ईश्वर से व्याप्त इस शरीर के निमित्त (ऋज्रा) ऋजुगामी नासिका रूप दो अश्व (आददे) लेता हूँ। (ऋक्षस्य+सूनवि) शुद्ध जीवात्मा के पुत्र शरीर के हेतु (हरी) हरणशील नयनरूप दो अश्व विद्यमान हैं और पुनः (आश्वमेधस्य) इन्द्रियाश्रय शरीर के कल्याण के लिये (रोहिता) प्रादुर्भूत कर्णरूप दो इसमें संयुक्त हैं ॥१५॥
Connotation: - हे नरो ! यह पवित्र शरीर तुमको दिया गया है, इससे शुभ कर्म करो ॥१५॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
'अरुषी-कशावती' बुद्धि
Word-Meaning: - (एषु ऋज्रेषु अन्तः) = इन सरल गतिवाले इन्द्रियाश्वों से युक्त पुरुषों के हृदयों में (वृषण्वती) = शक्तिशाली प्राणोंवाली, (अरुषी) = आरोचमान, (स्वभीशुः) = उत्तम लगामवाली सम्यक् नियन्त्रण करनेवाली, (कशावती) = उत्तम ज्ञान की वाणियोंवाली बुद्धि (आचेतत्) = सर्वथा चेतना को करनेवाली होती है।
Connotation: - भावार्थ- हम ऋज्र बनें-सरल गतिवाले बनें। हमें वह बुद्धि प्राप्त होगी जो उत्तम ज्ञान की वाणियों को प्राप्त कराती हुई तथा हमारे जीवनों में सम्यक् नियन्त्रण करती हुई हमें प्राणशक्तिसम्पन्न व आरोचमान बनाएगी।
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - अहमुपासकः। इन्द्रोते=इन्द्रेणेशेन। उते=व्याप्ते शरीरे। ऋज्रा=ऋजुगामिनौ=नासिकारूपौ। आददे=गृह्णामि। ऋक्षस्य=मृक्षस्य शुद्धस्य जीवस्य। सूनवि=सूनौ शरीरे। हरी=हरणशीलौ नयनात्मकौ। अश्वावाददे। आश्वमेधस्य अश्वाः=इन्द्रियाणि यत्र मेध्यन्ते इज्यन्ते सोऽश्वमेधः। स एवाश्वमेधः। तस्य शरीरस्य कल्याणाय। रोहिता=रोहितौ कर्णात्मकौ। अश्वौ आददे ॥१५॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - In the midst of these simple and straight organs of sense, fast but well steered, there is one which is extremely generous and creative, the intelligence, which holds the whip and the reins both, that is, the acceleration and the steer and the brakes for proper movement of the systemic chariot.
