Devata: आदित्याः
Rishi: मत्स्यः साम्मदो मान्यो वा मैत्रावरुणिर्बहवो वा मत्स्या जालनध्दाः
Chhanda: निचृद्गायत्री
Swara: षड्जः
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त्यान्नु क्ष॒त्रियाँ॒ अव॑ आदि॒त्यान्या॑चिषामहे । सु॒मृ॒ळी॒काँ अ॒भिष्ट॑ये ॥
English Transliteration
Mantra Audio
tyān nu kṣatriyām̐ ava ādityān yāciṣāmahe | sumṛḻīkām̐ abhiṣṭaye ||
Pad Path
त्यान् । नु । क्ष॒त्रिया॑न् । अवः॑ । आ॒दि॒त्यान् । या॒चि॒षा॒म॒हे॒ । सु॒ऽमृ॒ळी॒कान् । अ॒भिष्ट॑ये ॥ ८.६७.१
Rigveda » Mandal:8» Sukta:67» Mantra:1
| Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:51» Mantra:1
| Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:1
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - (इन्द्र) हे परमैश्वर्य्यसंयुक्त महेश्वर ! (वयम्+घ) हम उपासकगण (ते) तेरे ही हैं, तेरे ही पुत्र और अनुग्रहपात्र हैं, इसी कारण (विप्राः) हम मेधावी स्तुतिपाठक (त्वे+इद्+ऊम्) तेरे ही अधीन होकर (स्मसि) विद्यमान और जीवननिर्वाह करते हैं, (अपि) इसमें सन्देह नहीं। (हि) क्योंकि (पुरुहूत) हे बहुहूत हे बहुपूजित (मघवन्) हे सर्वधन महेश ! (त्वदन्यः) तुझसे बढ़कर अन्य (कश्चन) कोई देव या राजा या महाराज (मर्डिता+न+अस्ति) सुख पहुँचानेवाला नहीं है ॥१३॥
Connotation: - ईश्वर से बढ़कर पालक पोषक व कृपालु कोई नहीं, अतः उसी की उपासना प्रेमभक्ति और श्रद्धा से करनी चाहिये ॥१३॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
आदित्यों द्वारा रक्षण
Word-Meaning: - [१] अपने जीवन में ऊँचे-से-ऊँचे ज्ञान का आदान करनेवाले 'आदित्य' कहलाते हैं। ये आदित्य क्षतों से त्राण करनेवाले होते हुए 'क्षत्रिय' कहे जाते हैं। (नु) = अब (त्यान्) = उन (आदित्यान्) = ज्ञान का आदान करनेवाले (क्षत्रियान्) = बलसम्पन्न पुरुषों से हम (अव याचिषामहे) = रक्षण की याचना करते हैं। ये आदित्य क्षत्रिय सब क्षतों से हमें बचानेवाले हों। [२] (सुमृडीकान्) = उत्तम सुख को प्राप्त करनेवाले इन आदित्यों को (अभिष्टये) = इष्ट प्राप्ति के लिए हम प्रार्थना करते हैं।
Connotation: - भावार्थ- आदित्य विद्वानों का सम्पर्क हमें रक्षण व सुख प्राप्त कराता है।
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - हे इन्द्र ! ते=तवैव। वयं घ=वयं खलु वर्तामहे। अतः। त्वे इद्+ऊं=तवाधीना एव वयं विप्राः। स्मसि=स्मः। अपि=संभावनायाम्। हे पुरुहूत हे मघवन् ! त्वदन्यः न हि कश्चिद् देवः मर्डिता सुखयितास्ति ॥१३॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - For the sake of protection and to achieve our cherished objects, we call upon the Kshatriyas, warriors of the nation, bright as children of light and firm as children of Infinity, providers of peace, happiness and security.
