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सचा॒ सोमे॑षु पुरुहूत वज्रिवो॒ मदा॑य द्युक्ष सोमपाः । त्वमिद्धि ब्र॑ह्म॒कृते॒ काम्यं॒ वसु॒ देष्ठ॑: सुन्व॒ते भुव॑: ॥

English Transliteration

sacā someṣu puruhūta vajrivo madāya dyukṣa somapāḥ | tvam id dhi brahmakṛte kāmyaṁ vasu deṣṭhaḥ sunvate bhuvaḥ ||

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Pad Path

सचा॑ । सोमे॑षु । पु॒रु॒ऽहू॒त॒ । व॒ज्रि॒ऽवः॒ । मदा॑य । द्यु॒क्ष॒ । सो॒म॒ऽपाः॒ । त्वम् । इत् । हि । ब्र॒ह्म॒ऽकृते॑ । काम्य॑म् । वसु॑ । देष्ठः॑ । सु॒न्व॒ते । भुवः॑ ॥ ८.६६.६

Rigveda » Mandal:8» Sukta:66» Mantra:6 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:49» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:6


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (यः) जो परमात्मा (शक्रः) सर्वशक्तिमान् (मृक्षः) शुद्ध और (अश्व्यः) व्यापक है (यः+वा) और जो (कीजः) कीर्तनीय (हिरण्ययः) हित और रमणीय है (सः) वह (ऊर्वस्य) अतिविस्तीर्ण (गव्यस्य) गतिमान् जगत् की (अपवृतिम्) निखिल बाधाओं को (रेजयति) दूर किया करता है, क्योंकि जो (वृत्रहा) वृत्रहा=निखिल विघ्ननिवारक नाम से प्रख्यात है ॥३॥
Connotation: - परमेश्वर सर्वशक्तिमान् व शुद्धादि गुण भूषित है, अतः वही मनुष्यों का कीर्तनीय, स्मरणीय और पूजनीय है ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ब्रह्मकृते सुन्वते

Word-Meaning: - [१] हे (पुरुहूत) = बहुतों से पुकारे जानेवाले, (वज्रिवः) = वज्रहस्त, (द्युक्ष) = ज्योति में निवास करनेवाले प्रभो! आप (सोमेषु) = सोमकणों के शरीर में सुरक्षित होने पर (सचा) = हमारे साथ होते हैं। सोमरक्षण द्वारा हम आप को प्राप्त करते हैं। वस्तुतः हे प्रभो! आप ही (सोमपाः) = हमारे सोम का रक्षण करते हो- आपके स्तवन से सोम का रक्षण करते हुए हम (मदाय) = उल्लास के लिए होते हैं। सुरक्षित सोम हमें उल्लसित जीवनवाला बनाता है। [२] (त्वम् इत् हि) = आप (ही) = निश्चय से (ब्रह्मकृते) = ज्ञान का सम्पादन करनेवाले (सुन्वते) = यज्ञशील पुरुष के लिए (काम्यं वसु) = कमनीय धन को (देष्ठः भुवः) = अधिक-से-अधिक देनेवाले होते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु सोमरक्षण द्वारा हमारे जीवन को उल्लासमय बनाते हैं। ज्ञानी यज्ञशील पुरुष के लिए प्रभु ही कमनीय धनों को प्राप्त कराते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - यः। शक्रः=सर्वशक्तिमान्। मृक्षः=शुद्धः। अश्व्यः=व्यापकः “अशू व्याप्तौ” यो वेन्द्रः। कीजः=कीर्तनीयः। हिरण्ययः= हितो रमणीयश्च। स इन्द्रः। ऊर्वस्य= अतिविस्तीर्णस्य। गव्यस्य=गतियुक्तस्य जगतः। अपवृतिम्=बाधाम्। रेजयति=कम्पयति। निवारयतीत्यर्थः। यतः स वृत्र हेति प्रसिद्धः ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Lord all-invoked and adored, wielder and commander of thunder, clouds and mountains, light of life in heaven and on earth, connoisseur, protector and promoter of the soma joy of humanity, join and be with us in our yajnic creations of soma joy in action.