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विश्वाँ॑ अ॒र्यो वि॑प॒श्चितोऽति॑ ख्य॒स्तूय॒मा ग॑हि । अ॒स्मे धे॑हि॒ श्रवो॑ बृ॒हत् ॥

English Transliteration

viśvām̐ aryo vipaścito ti khyas tūyam ā gahi | asme dhehi śravo bṛhat ||

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Pad Path

विश्वा॑न् । अ॒र्यः । वि॒पः॒ऽचितः॑ । अति॑ । ख्यः॒ । तूय॑म् । आ । ग॒हि॒ । अ॒स्मे इति॑ । धे॒हि॒ । श्रवः॑ । बृ॒हत् ॥ ८.६५.९

Rigveda » Mandal:8» Sukta:65» Mantra:9 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:47» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:9


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! (सुतावन्तः) सदा शुभकर्मपरायण और (प्रयस्वन्तः) दरिद्रों के देने के लिये और अग्निहोत्रादि कर्म करने के लिये सब प्रकार के अन्न और सामग्रियों से सम्पन्न होकर (वयम्) हम उपासक (नः) हमारे (इदम्+बर्हिः) इस हृदयप्रदेश में (आसदे) प्राप्त होने के लिये (त्वाम्) तुझको (हवामहे) बुलाते और स्तुति करते हैं ॥६॥
Connotation: - सुतावन्तः=इससे यह दिखलाते हैं कि प्रथम शुभकर्मी बनो, प्रयस्वन्तः=तब सकल सामग्रीसम्पन्न होओ, तब तुम ईश्वर को बुलाने के अधिकारी होवोगे ॥६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ज्ञानदाता प्रभु

Word-Meaning: - [१] हे इन्द्र! (अर्यः) = आप ही स्वामी हैं। (विश्वान्) = सब (विपश्चितः) = ज्ञानियों को (अतिख्यः) = आप ही अतशयेन ज्ञान से दीप्त करते हैं। आप (तूयम्) = शीघ्रता से (आगहि) = हमें प्राप्त होइए। [२] आप (अस्मे) = हमारे लिए (बृहत् श्रवः) = बहुत ज्ञान को (धेहि) = धारण कीजिए ।
Connotation: - भावार्थ- सब ज्ञानियों को प्रभु ही ज्ञानदीप्त करते हैं। प्रभु का हम पर भी अनुग्रह हो और प्रभु हमें उत्कृष्ट ज्ञान को दें।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! सुतावन्तः=शुभकर्मवन्तः। प्रयस्वन्तः= समिदादिसामग्रीसम्पन्नाः। वयम्। नोऽस्माकं इदम्। बर्हिः=हृदयप्रदेशम्। आसदे=आसत्तुं=प्राप्तुम्। हवामहे= आह्वयामः। स्तुमः ॥६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, you are the ruler and controller of the world. Pray come soon and watch all the exceptional sages and scholars of the world, and bring us food, energy, honour and fame of universal value.