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आ त्वा॑ गी॒र्भिर्म॒हामु॒रुं हु॒वे गामि॑व॒ भोज॑से । इन्द्र॒ सोम॑स्य पी॒तये॑ ॥

English Transliteration

ā tvā gīrbhir mahām uruṁ huve gām iva bhojase | indra somasya pītaye ||

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Pad Path

आ । त्वा॒ । गीः॒ऽभिः । म॒हाम् । उ॒रुम् । हु॒वे । गाम्ऽइ॑व । भोज॑से । इन्द्र॑ । सोम॑स्य । पी॒तये॑ ॥ ८.६५.३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:65» Mantra:3 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:46» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:3


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हम उपासक (अद्य) आज (चारुम्) परमसुन्दर (तम्) उस परमदेव की स्तुति करते हैं, (राधसे) धन और आराधना के लिये (मदाय) आनन्द के लिये और (घृष्वये) निखिल शत्रु के विनाश के लिये उसकी उपासना करते हैं। (इन्द्र) हे इन्द्र ! वह तू (ईम्) इस समय (एहि) आ, (द्रव) कृपा कर और (पिब) कृपादृष्टि से देख ॥१२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

भोजसे पीतये

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (गीर्भिः) = ज्ञान की वाणियों से (त्वा आहुवे) = आपको पुकारता हूँ। जो आप (महाम्) = महान् हैं-पूजनीय हैं तथा (उरुं) = विशाल व सर्वव्यापक हैं। [२] आपको मैं इसप्रकार पुकारता हूँ (इव) = जैसे (भोजसे) = पालन व पोषण के लिए (गाम्) = गौ को पुकारते हैं। गौ दूध देकर हमारा पालन पोषण करती है, इसी प्रकार प्रभु ज्ञानदुग्ध प्राप्त कराके हमारा रक्षण करते हैं। हे इन्द्र ! मैं आपको (सोमस्य पीतये) = सोम के पान के लिए पुकारता हूँ। आपकी आराधना ही सोम का रक्षण करके हमारे ज्ञान की वृद्धि का कारण बनती है।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु महान् हैं-सर्वव्यापक हैं। ज्ञानदुग्ध देकर प्रभु हमारा रक्षण करते हैं। सोमरक्षण द्वारा प्रभु ही हमारी ज्ञानाग्नि को दीप्त करते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - वयम्। चारुम्=परमसुन्दरम्। तमद्य=तमिन्द्रम् अस्मिन् दिने। राधसे=अन्नाय=आराधनाय वा। मदाय= आनन्दाय। घृष्वये=शत्रूणां विनाशाय च स्तुम इति शेषः। हे इन्द्र ! स त्वम्। एहि। ईम्=इदानीम्। द्रव पिब च ॥१२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, I invoke you, glorious lord immanent in the vast world, to come and protect the beauty and joy of your creation and taste the soma of its grandeur, as I would call the cow to its favourite love of food.