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कस्य॑ स्वि॒त्सव॑नं॒ वृषा॑ जुजु॒ष्वाँ अव॑ गच्छति । इन्द्रं॒ क उ॑ स्वि॒दा च॑के ॥

English Transliteration

kasya svit savanaṁ vṛṣā jujuṣvām̐ ava gacchati | indraṁ ka u svid ā cake ||

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Pad Path

कस्य॑ । स्वि॒त् । सव॑नम् । वृषा॑ । जु॒जु॒ष्वान् । अव॑ । ग॒च्छ॒ति॒ । इन्द्र॑म् । कः । ऊँ॒ इति॑ । स्वि॒त् । आ । च॒के॒ ॥ ८.६४.८

Rigveda » Mandal:8» Sukta:64» Mantra:8 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:45» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:8


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! तू ही जलवर्षिता भी है, तू (स्तोतृभ्यः) स्तुतिपरायण इन समस्त प्राणियों के कल्याण के लिये (त्यम्+चित्) उस (गिरिम्) मेघ को (वि+रुरोजिथ) विविध प्रकार से छिन्न-भिन्न कर बरसाता है, जो मेघ (पर्वतम्) अनेक पर्वतों से युक्त हैं, जो (शतवन्तम्) संख्या में सैकड़ों और (सहस्रिणम्) सहस्रों हैं ॥५॥
Connotation: - जलवर्षणकर्ता भी वही देव है। सृष्टि की आदि में कहाँ से ये मेघ आए, इनकी उत्पत्ति किस प्रकार हुई, यदि मेघ न हो, तो जीव भी यहाँ न होते इत्यादि भावना सदा करनी चाहिये ॥५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

यज्ञशीलता व प्रभुलिप्सा

Word-Meaning: - [१] (वृषा) = वह सुखों का वर्षक प्रभु (कस्य स्वित्) = किसी के ही (सवनं जुजुष्वान्) = यज्ञ को प्रीति से सेवन करता हुआ (अवगच्छति) = इसे अपना प्रिय जानता है। संसार में विरल व्यक्ति ही यज्ञों द्वारा प्रभु को प्रीणित करनेवाले होते हैं। [२] (कः उ स्वित्) = और कोई ही (इन्द्रं आचके) = उस प्रभु की प्राप्ति की कामनावाला होता है। मनुष्य सामान्यतः धन को चाहता है-धन को देनेवाले प्रभु को नहीं।
Connotation: - भावार्थ- संसार में विरल ही पुरुष यज्ञशील हैं और विरल ही प्रभुप्राप्ति की कामनावाले होते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! त्वम्। स्तोतृभ्यः=स्तुतिकर्तृभ्यो जनेभ्यः। शतवन्तं सहस्रिणञ्च। त्यं चित्। तं पर्वतं गिरिम्। विरुरोजिथ=विरुजसि ॥५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Whose yajna does the generous and virile Indra visit and bless out of love and kindness? And who really knows Indra, in all fairness?