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त्वमी॑शिषे सु॒ताना॒मिन्द्र॒ त्वमसु॑तानाम् । त्वं राजा॒ जना॑नाम् ॥

English Transliteration

tvam īśiṣe sutānām indra tvam asutānām | tvaṁ rājā janānām ||

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Pad Path

त्वम् । ई॒शि॒षे॒ । सु॒ताना॑म् । इ॒न्द्र॒ । त्वम् । असु॑तानाम् । त्वम् । राजा॑ । जना॑नाम् ॥ ८.६४.३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:64» Mantra:3 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:44» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:3


SHIV SHANKAR SHARMA

इन्द्र के निकट प्रार्थना की जाती है।

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे इन्द्र=परमेश्वर ! (अस्मे) हमारे निकट (रुद्राः) पर-दुःखहारी जन वृत्रहत्ये+भरहूतौ=विघ्नविनाशक सांसारिक संग्राम के समय (अवन्तु) आवें (मेहनाः) दया और सुवचनों के वर्षा करनेवाले (पर्वतासः) ज्ञानादि से पूर्ण और प्रसन्न करनेवाले (सजोषाः) हमारे साथ समान प्रीति रखनेवाले (ज्येष्ठाः+देवाः) ज्येष्ठ श्रेष्ठ विद्वान् (अवन्तु) हमारे निकट आवें तथा (शंसते) ईश्वरीय प्रशंसक के और (स्तुवते) स्तावक जन के निकट (यः+धायि) जो दौड़ता है, (पज्रः) जो बलवान् हो, इस प्रकार के जन सदा हमको प्राप्त हों ॥१२॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'मुक्त व अमुक्त सभी का ईश' प्रभु

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (त्वं) = आप (सुतानां) = कर्मानुसार उस-उस शरीर को ग्रहण करनेवाले उत्पन्न लोगों के (ईशिषे) = ईश होते हैं। (त्वम्) = आप ही (असुतानाम्) = शरीर को न धारण करनेवाले, उत्पन्न न होनेवाले मुक्त पुरुषों के भी ईश हैं। [२] (त्वं) = आप ही (जनानाम्) = सब जन्म- धारियों के (राजा) = व्यवस्थापक-कर्मानुसार फल देनेवाले हैं।
Connotation: - भावार्थ- मुक्त व अमुक्त सभी के प्रभु ईश हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

इन्द्रनिकटे प्रार्थना क्रियते।

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! वृत्रहत्ये=विघ्नविनाशके। भरहूतौ=संग्रामे। अस्मान्। देवाः श्रेष्ठा जनाः सदा अवन्तु=प्राप्नुवन्तु। ज्येष्ठाश्चास्मान् अवन्तु। रुद्राः=परमदुःखद्राविणः। हे मेहनाः=अनुग्रहवर्षितारः ! पर्वतासः=पर्वताः पूरणवन्तः प्रीणनवन्तो वा। सजोषाः=समानप्रीतिश्च जनः। यश्च शंसते=स्तुवते जनाय। धायि=धावति। यश्च पज्रः=बलवान् इत्येवंविधा जना अस्मानवन्तु ॥१२॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - You rule over the creative and cooperative men of positive action. You rule over the uncreative and destructive men of negative action as well. Indra, you are the ruler, the ultimate ordainer of good and evil both.