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तम॒द्य राध॑से म॒हे चारुं॒ मदा॑य॒ घृष्व॑ये । एही॑मिन्द्र॒ द्रवा॒ पिब॑ ॥
English Transliteration
Mantra Audio
tam adya rādhase mahe cārum madāya ghṛṣvaye | ehīm indra dravā piba ||
Pad Path
तम् । अ॒द्य । राध॑से । म॒हे । चारु॑म् । मदा॑य । घृष्व॑ये । आ । इ॒हि॒ । ई॒म् । इ॒न्द्र॒ । द्रव॑ । पिब॑ ॥ ८.६४.१२
Rigveda » Mandal:8» Sukta:64» Mantra:12
| Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:45» Mantra:6
| Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:12
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - (वृत्रहन्) हे विघ्नविनाशक इन्द्र ! (कम्) किसको (ते+दानाः) तेरे दान (असक्षत) प्राप्त होते हैं, (कम्) किसको तेरी कृपा से (सुवीर्य्या) शोभन वीर्य्य और पुरुषार्थ मिलते हैं। (उक्थे) स्तोत्र सुनकर (कः+उ+स्वित्) कौन उपासक तेरा (अन्तमः) समीपी और प्रियतम होता है ॥९॥
Connotation: - उसके अनुग्रहपात्र कौन हैं, इस पर सब कोई विचार करें ॥९॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
राधसे-मदाय- घृष्वये
Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = जितेन्द्रिय पुरुष ! (तम्) = उस (चारुं) = सुन्दर अथवा चरणीय [भक्षणीय] सोम को (महे) = महान् (राधसे) = सफलता व ऐश्वर्य के लिए (पिब) = शरीर में ही पीनेवाला हो। [२] पिया हुआ यह सोम (मदाय) = आनन्द के लिए होता है तथा (घृष्वये) = शत्रुओं के घर्षण के लिए होता है। (एहि) = आओ द्रव = गतिमय जीवनवाले बनो और ईम् इस समय इस सोम का पान करो। शरीर में ही इसे सुरक्षित करो।
Connotation: - भावार्थ- सुरक्षित सोम महान् साफल्य के लिए होता है। आनन्द को प्राप्त कराता है तथा शत्रुओं का घर्षण करता है। अगले सूक्त के ऋषि देवता भी 'प्रागाथ काण्व' व 'इन्द्र' हैं-
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - हे इन्द्र ! ते=तवादानाः=दानानि। कं पुरुषम्। असक्षत=प्राप्नुवन्ति। हे वृत्रहन् ! कमुपासकम्। सुवीर्य्या=शोभनवीर्य्याणि च। क उ। स्वित्=कः खलु। उक्थे=स्तोत्रे। अन्तमः=अन्तिकतमस्तव ॥९॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - To that soma yajna being performed for gifts of great wealth and power, excitement and joy, and the destruction of negativities, pray come fast and drink the soma of love, faith and homage.
