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उत्त्वा॑ मन्दन्तु॒ स्तोमा॑: कृणु॒ष्व राधो॑ अद्रिवः । अव॑ ब्रह्म॒द्विषो॑ जहि ॥

English Transliteration

ut tvā mandantu stomāḥ kṛṇuṣva rādho adrivaḥ | ava brahmadviṣo jahi ||

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Pad Path

उत् । त्वा॒ । म॒न्द॒न्तु॒ । स्तोमाः॑ । कृ॒णु॒ष्व । राधः॑ । अ॒द्रि॒ऽवः॒ । अव॑ । ब्र॒ह्म॒ऽद्विषः॑ । ज॒हि॒ ॥ ८.६४.१

Rigveda » Mandal:8» Sukta:64» Mantra:1 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:44» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:1


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे मनुष्यों ! हम सब (युष्माभिः) आप लोगों के साथ मिलकर (मरुत्वतः) प्राणप्रद परमात्मा के गुणों और यशों को बढ़ाने के लिये ही (स्याम) जीवन धारण करें तथा (तत्+दधानाः) सदा उसको अपने-अपने सर्व कर्म में धारण करें और उसी से (अवस्यवः) रक्षा की इच्छा करें और (दक्षपितरः) बलों के स्वामी होवें ॥१०॥
Connotation: - हे मनुष्यों ! ईश्वर हमारा पिता है, हम उसके पुत्र हैं, अतः हमारा जीवन उसके गुणों और यशों को सदा बढ़ावे अर्थात् हम उसके समान पवित्र सत्य आदि होवें। हम उसको कदापि न त्यागें ॥१०॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

धन व सत्संग

Word-Meaning: - [१] हे (अद्रिवः) = आदरणीय प्रभो ! (त्वा) = आपको (स्तोमा:) = हमारे से की जानेवाली स्तुतियाँ (उत् मन्दन्तु) = उत्कर्षेण आनन्दित करें। ये स्तोत्र हमें आपका प्रिय बनाएँ। आप हमारे लिए (राधः कृणुष्व) = कार्यसाधक धनों को कीजिए । [२] (ब्रह्मद्विषः) = ज्ञान से अप्रीतिवाले लोगों को (अवजहि) = हमारे से दूर करिये। हमें ज्ञानी लोगों का ही सम्पर्क प्राप्त हो । मूर्खों के सम्पर्क से हम सदा दूर रहें ।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रभुस्तवन करते हुए कार्यसाधक धनों को प्राप्त करें और ज्ञानियों के सम्पर्क में रहें।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे मनुष्याः ! वयं सर्वे। युष्माभिः सह। मरुत्वतः=प्राणप्रदस्य ईश्वरस्य। वृधे=गुणानां यशसां च वर्धनाय। तत्=तमीशम्। दधानाः। अवस्यवः=रक्षाकामाः। दक्षपितरः=बलस्वामिनश्च। स्याम ॥१०॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, lord almighty, commander, controller and inspirer of clouds, mountains and great men of generosity, may our hymns of adoration win your pleasure. Pray create and provide means and methods of sustenance and progress in life, and cast off jealousies and enmities against divinity, knowledge and prayer, our bond between human and divine.