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अ॒हं च॒ त्वं च॑ वृत्रह॒न्त्सं यु॑ज्याव स॒निभ्य॒ आ । अ॒रा॒ती॒वा चि॑दद्रि॒वोऽनु॑ नौ शूर मंसते भ॒द्रा इन्द्र॑स्य रा॒तय॑: ॥

English Transliteration

ahaṁ ca tvaṁ ca vṛtrahan saṁ yujyāva sanibhya ā | arātīvā cid adrivo nu nau śūra maṁsate bhadrā indrasya rātayaḥ ||

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Pad Path

अ॒हम् । च॒ । त्वम् । च॒ । वृ॒त्र॒ऽह॒न् । सम् । यु॒ज्या॒व॒ । स॒निऽभ्यः॑ । आ । अ॒रा॒ति॒ऽवा । चि॒त् । अ॒द्रि॒ऽवः॒ । अनु॑ । नौ॒ । शू॒र॒ । मं॒स॒ते॒ । भ॒द्राः । इन्द्र॑स्य । रा॒तयः॑ ॥ ८.६२.११

Rigveda » Mandal:8» Sukta:62» Mantra:11 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:41» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:11


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे इन्द्र ! परमैश्वर्य्यसंयुक्त (शचीपते) बलाधिदेव ! (यत्) जिस कारण तू (ओजसा) स्वकीयनियमरूप प्रताप से (वृत्रम्+हंसि) निखिल विघ्नों को दूर किया करता है, इस कारण (देवतातये) शुभ कामना की सिद्धि के लिये (ते) तेरा (उपमम्) प्रशंसनीय (तत्+शवः) उस-२ बल को मैं (गृणे) गाता हूँ या सब ही गा रहे हैं ॥८॥
Connotation: - हम सब मिल कर प्रतिदिन धन्यवाद देवें, क्योंकि वह हमको प्रतिक्षण सुख दे रहा है ॥८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

प्रभु के साथ मेल व ऐश्वर्यलाभ

Word-Meaning: - [१] हे (वृत्रहन्) = वासना को विनष्ट करनेवाले प्रभो ! (अहं च त्वम् च) = मैं और आप (आ सनिभ्यः) = समन्तात् ऐश्वर्य के प्राप्ति के लिए (संयुज्याव) = सम्यक् मिल जाएँ। मैं आपके साथ एक होकर ही तो सब ऐश्वर्यों को पानेवाला बनता हूँ। [२] हे (अद्रिवः) = वज्रहस्त अथवा आदरणीय शूर शत्रुओं को शीर्ण करनेवाले प्रभो ! नौ इकठ्ठे हुए हुए हमारे (आरातीवा) = अदानशील पुरुष भी (अनुमंसते) = अनुकूल मतिवाला होता है। प्रभु के साथ एक हो गये उपासक को (कृपण) = व्यक्ति भी उदारता से धनों का देनेवाला होता है। उस (इन्द्रस्य) = परमैश्वर्यशाली प्रभु की (रातयः) = देन (भद्राः) = अतिशयेन कल्याणकर हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु के साथ मेल हो जाने पर सब ऐश्वर्यों की प्राप्ति हो जाती है।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र ! हे शचीपते=बलाधिदेव ! यत्त्वम्। ओजसा=बलेन। वृत्रं=सर्वान् विघ्नान्। हंसि। अतः। देवतातये=शुभकामनासिद्ध्यै। ते=तव। उपममुपमातव्यं प्रशंसनीयम्। तत्+शवः=बलम्। गृणे=स्तुवे। स्तुवन्ति वा सर्वे ॥८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Let us both, I and you, destroyer of want and evil, join for the attainment of wealth and fulfilment. O lord of might, controller of clouds and breaker of mountains, even the malignant and niggardly would agree to our cooperation. Great and glorious are the gifts of Indra.