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उज्जा॒तमि॑न्द्र ते॒ शव॒ उत्त्वामुत्तव॒ क्रतु॑म् । भूरि॑गो॒ भूरि॑ वावृधु॒र्मघ॑व॒न्तव॒ शर्म॑णि भ॒द्रा इन्द्र॑स्य रा॒तय॑: ॥

English Transliteration

uj jātam indra te śava ut tvām ut tava kratum | bhūrigo bhūri vāvṛdhur maghavan tava śarmaṇi bhadrā indrasya rātayaḥ ||

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Pad Path

उत् । जा॒तम् । इ॒न्द्र॒ । ते॒ । शवः॑ । उत् । त्वाम् । उत् । तव॑ । क्रतु॑म् । भूरि॑गो॒ इति॒ भूरि॑ऽगो । भूरि॑ । व॒वृ॒धुः॒ । मघ॑ऽवन् । तव॑ । शर्म॑णि । भ॒द्राः । इन्द्र॑स्य । रा॒तयः॑ ॥ ८.६२.१०

Rigveda » Mandal:8» Sukta:62» Mantra:10 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:41» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:10


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (इन्द्र) हे परमैश्वर्य्य ! (पुरुष्टुतः) हे सर्वस्तुत देव ! (ते) तेरे (वीर्य्यम्) वीर्य (क्रतुम्) कर्म और प्रज्ञा को (विश्वे+देवाः) सब पदार्थ (अनु+ददुः) धारण किये हुए हैं अर्थात् तेरी शक्ति, कर्म और ज्ञान से ही ये सकल पदार्थ शक्तिमान्, कर्मवान् और ज्ञानवान् हैं, इस हेतु तू (विश्वस्य) सम्पूर्ण जगत् का (गोपतिः) चरवाह है ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

बल- प्रभु- प्रज्ञान

Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = सर्वशक्तिमन् प्रभो ! (जातम्) = अपने अन्दर उत्पन्न हुए-हुए (ते शवः) = आपके बल को ये उपासक सोमरक्षण द्वारा (भूरि) = खूब ही (उद् वावृधुः) = बढ़ाते हैं । शक्ति को ही क्या बढ़ाते हैं, (त्वाम् उत्) = [वावृधुः] = आपको ही वे अपने अन्दर बढ़ाते हैं । (तव) = आपके (क्रतुम्) = प्रज्ञान को (उत्) [वावृधुः] = बढ़ाते हैं । उपासक प्रभु की शक्ति को प्रभु को व प्रज्ञान को अपने अन्दर धारण करता है। [२] हे (भूरिगो) = पालक व पोषक [भृ धारणपोषणयोः] ज्ञान की वाणियोंवाले (मघवन्) = ऐश्वर्यशालिन् प्रभो ! (तव शर्मणि) = आपके आशीर्वाद व रक्षण में ये (भूरि वावृधुः) = खूब ही वृद्धि को प्राप्त होते हैं । (इन्द्रस्य) = ऐश्वर्यशाली आपकी (रातयः) = देन (भद्राः) = सदा कल्याणकर हैं।
Connotation: - भावार्थ- उपासक में प्रभु का बल, प्रभु की भावना व प्रज्ञान का वर्धन होता है। ये प्रभु के आशीर्वाद से खूब ही वृद्धि को प्राप्त करते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे इन्द्र हे पुरुष्टुत ! ते=तव। वीर्यं=शक्तिम्। क्रतुं=कर्म प्रज्ञाञ्च। अनु=अनुसृत्य। विश्वेदेवाः। ददुः=वीर्य्यं क्रतुञ्च धारयन्ति। तवैव वीर्य्येण, कर्मणा प्रज्ञया च सर्वे पदार्थाः वीर्य्यवन्तः कर्मवन्तो ज्ञानवन्तश्च सन्तीत्यर्थः। स त्वम्। विश्वस्य=सर्वस्य। गोपतिरिव। भुवः=भवसि। भद्रा इत्यादि पूर्ववत् ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra, lord of great wealth and knowledge, honour and excellence, the celebrants repeatedly sing and exalt your glory manifested around, they celebrate you and your holy work under the umbrella of your protection. Great and good are the gifts of Indra.