Go To Mantra
Viewed 377 times

शोचा॑ शोचिष्ठ दीदि॒हि वि॒शे मयो॒ रास्व॑ स्तो॒त्रे म॒हाँ अ॑सि । दे॒वानां॒ शर्म॒न्मम॑ सन्तु सू॒रय॑: शत्रू॒षाह॑: स्व॒ग्नय॑: ॥

English Transliteration

śocā śociṣṭha dīdihi viśe mayo rāsva stotre mahām̐ asi | devānāṁ śarman mama santu sūrayaḥ śatrūṣāhaḥ svagnayaḥ ||

Mantra Audio
Pad Path

शोच॑ । शो॒चि॒ष्ठ॒ । दी॒दि॒हि । वि॒शे । मयः॑ । रास्व॑ । स्तो॒त्रे । म॒हान् । अ॒सि॒ । दे॒वाना॑म् । शर्म॑न् । मम॑ । स॒न्तु॒ । सू॒रयः॑ । श॒त्रु॒ऽसहः॑ । सु॒ऽअ॒ग्नयः॑ ॥ ८.६०.६

Rigveda » Mandal:8» Sukta:60» Mantra:6 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:33» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:6


SHIV SHANKAR SHARMA

अब अग्नि का वर्णन करते हैं।

Word-Meaning: - (अग्ने) हे सर्वाधार सर्वशक्ते महेश ! (कविः) तू ही महा कवि है, (वेधाः) तू ही सर्व कर्मों और जगतों का विधाता है, (होता) तू ही होता है। (पावक) हे पवित्रकारक हे परमपवित्र देव ! तू (मन्द्रः) आनन्दप्रद (यजिष्ठः) अतिशय यजनीय और (अध्वरेषु) सब शुभकर्मों में (विप्रैः) मेधावी विद्वानों द्वारा (मन्मभिः) मननीय स्तोत्रों से (ईड्यः) स्तुत्य पूज्य और प्रशंसनीय है। (शुक्र) हे सर्वदीपक ! तू ही परम पूज्य है ॥३॥
Connotation: - ईश्वर ही सदा पूज्य है, यह इसका अभिप्राय है ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

सूरयः शत्रूषाहः स्वग्नयः

Word-Meaning: - [१] हे (शोचिष्ठ) = अतिशयेन दीप्त होनेवाले प्रभो! आप शोच दीप्त होइये और (दीदिहि) = हमें दीप्त करिए । (स्तोत्रे विशे) = स्तुति करनेवाली प्रजा के लिए (मयः रास्व) = कल्याण को दीजिए। आप (महान् असि) = महान् हैं-पूजनीय हैं। [२] (देवानां) = विद्वानों की (शर्मन्) = शरण में (मम) = मेरे पुत्र (सूरयः) = विद्वान्, (शत्रूषाहः) = काम-क्रोध आदि शत्रुओं का पराभव करनेवाले व (स्वग्नयः) = उत्तम यज्ञाग्नियोंवाले (सन्तु) = हों ।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु हमें दीप्त करें व हमारे लिए कल्याण प्राप्त कराएँ। प्रभु के अनुग्रह से हमारे सन्तान ज्ञानी गुरुओं के रक्षण में 'ज्ञानी पवित्र व शुभकर्म करनेवाले' बनें।

SHIV SHANKAR SHARMA

अग्निं विशिनष्टि।

Word-Meaning: - हे अग्ने ! सर्वाधार सर्वशक्ते महेश ! त्वमेव कविर्महाकविः। त्वमेव वेधाः=विधाता जगतां त्वं होता। हे पावक=हे पवित्रकारक परमपवित्र ! त्वमेव यक्ष्यः=यजनीयतमः। हे शुक्र=हे दीप्त ! त्वं मन्द्रः=आनन्दयिता। यजिष्ठः=यजनीयतमः। अध्वरेषु। विप्रैः कर्त्तृभिः। मन्मभिः=स्तोत्रैः साधनैः। ईड्यः=स्तुत्यः ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Lord most pure and refulgent, rise and shine and enlighten the world. Bless the people and the celebrants with peace and goodness. You are great and glorious. May our wise and brilliant leaders enjoy the goodwill of the divinities, be keepers of the holy fire and controllers of hate and enmities.