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स॒प्त होता॑र॒स्तमिदी॑ळते॒ त्वाग्ने॑ सु॒त्यज॒मह्र॑यम् । भि॒नत्स्यद्रिं॒ तप॑सा॒ वि शो॒चिषा॒ प्राग्ने॑ तिष्ठ॒ जनाँ॒ अति॑ ॥

English Transliteration

sapta hotāras tam id īḻate tvāgne sutyajam ahrayam | bhinatsy adriṁ tapasā vi śociṣā prāgne tiṣṭha janām̐ ati ||

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Pad Path

स॒प्त । होता॑रः । तम् । इत् । ई॒ळ॒ते॒ । त्वा॒ । अग्ने॑ । सु॒ऽत्यज॑म् । अह्र॑यम् । भि॒नत्सि । अद्रि॑म् । तप॑सा । वि । शो॒चिषा॑ । प्र । अ॒ग्ने॒ । ति॒ष्ठ॒ । जना॑न् । अति॑ ॥ ८.६०.१६

Rigveda » Mandal:8» Sukta:60» Mantra:16 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:35» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:16


SHIV SHANKAR SHARMA

ईश्वर से डरना चाहिये, यह इससे सिखलाते हैं।

Word-Meaning: - हे मनुष्यो ! तुम ईश्वर से डरो अर्थात् ईश्वर न्यायी है। यदि उससे विपरीत चलोगे, तो वह अवश्य दण्ड देवेगा। (अग्निः) वह सूर्य्यादि अग्नि के समान जाज्वल्यमान है, (दविध्वत्) दुष्टों को सदा कंपाया करता है। (यथा) जैसे (शृङ्गे+शिशानः) सींगों को तेज बनाता हुआ (वृषभः) साँढ गौवों को डराता है। (अस्य+हनवः) इसके हनुस्थानीय दन्त (तिग्माः) बड़े तीव्र हैं, (न+प्रतिधृषे) वे अनिवार्य्य हैं, (सुजम्भः) वह सुदंष्ट्र है और (सहसः) इस संसार का (यहुः) महान् रक्षक है। अतः इसके नियमों को पालो ॥१३॥
Connotation: - ईश्वर परम न्यायी है, केवल प्रार्थना से वह प्रसन्न नहीं होता, किन्तु जो कोई उसकी आज्ञा पर चलता है, वही उसका प्रिय है ॥१३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'सुत्यज अह्रय' प्रभु

Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = अग्रणी प्रभो ! (सप्त होतारः) = ' कर्णाविमौ नासिके चक्षणी मुखम्' दो कर्ण, दो नासिका, दो आँख व मुख रूप सप्त होता (तम् त्वा इत्) = उन आपको ही (ईडते) = स्तुत करते हैं। जो आप (सुत्यजम्) = उत्तम त्याग व दानवाले हैं तथा (अह्रयम्) = न क्षीण होनेवाले हैं। [२] आप (तपसा) = तप के द्वारा तथा (शेचिषा) = ज्ञानदीप्ति के द्वारा (अद्रि) = अविद्यापर्वत को (विभिनत्सि) = विदीर्ण करते हैं। हे (अग्ने) = अग्रणी प्रभो! आप (जनान्) = अपनी शक्तियों का विकास करनेवाले हमें (अति) = अतिशयेन (प्रतिष्ठ) = [प्रगच्छ] प्राप्त होवें ।
Connotation: - भावार्थ- हम कान, आँख आदि द्वारा प्रभु की महिमा को ही सुनें व देखें। प्रभु तप व के द्वारा हमारी अविद्या को विनष्ट करते हैं। शक्तियों का विकास करनेवालों को ही प्रभु प्राप्त

SHIV SHANKAR SHARMA

ईश्वराद् बिभेतव्यमित्यनया शिक्षते।

Word-Meaning: - अग्निः। दुष्टान्। दविध्वत्=कम्पयति। अत्र दृष्टान्तः। यथा शृङ्गे शिशानः=तीक्ष्णीकुर्वन् वृषभो गाः कम्पयति। हे मनुष्याः अस्य हनवः=हनुस्थानीया दन्ताः। तिग्माः=तीव्राः सन्ति। न प्रतिधृषे=निवारयितुमशक्याः। स कीदृशः। सुजम्भः=सुदंष्ट्रः। पुनः। सहसः=जगतः। यहुः=महान् पालकः ॥१३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, seven yajakas adore and serve you, all giver, imperishable and eternal. You cleave the mountains and expand and evaporate the clouds with your heat and flames of fire. Pray, Agni, stay among the people at the closest and rise high.