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शिशा॑नो वृष॒भो य॑था॒ग्निः शृङ्गे॒ दवि॑ध्वत् । ति॒ग्मा अ॑स्य॒ हन॑वो॒ न प्र॑ति॒धृषे॑ सु॒जम्भ॒: सह॑सो य॒हुः ॥

English Transliteration

śiśāno vṛṣabho yathāgniḥ śṛṅge davidhvat | tigmā asya hanavo na pratidhṛṣe sujambhaḥ sahaso yahuḥ ||

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Pad Path

शिशा॑नः । वृ॒ष॒भः । य॒था॒ । अ॒ग्निः । शृङ्गे॑ । दवि॑ध्वत् । ति॒ग्माः । अ॒स्य॒ । हन॑वः । न । प्र॒ति॒ऽधृषे॑ । सु॒ऽजम्भः॑ । सह॑सः । य॒हुः ॥ ८.६०.१३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:60» Mantra:13 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:34» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:13


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे ईश ! (विश्वस्मात्+रक्षसः) समस्त दुष्ट पुरुषों से (नः+पाहि) हमको बचा (अराव्णः) अदाता से हमको बचा तथा (वाजेषु) संसारसम्बन्धी संग्रामों में तू (प्र+अव) हमारी रक्षा कर। हे ईश ! (देवतातये) सम्पूर्ण शुभकर्म के लिये और (वृधे) सांसारिक अभ्युदय के लिये भी (त्वाम्+इत्+हि) तुझको ही (नक्षामहे) आश्रय बनाते हैं, क्योंकि तू (नेदिष्ठम्) अति समीप है, तू (आपिम्) यथार्थ बन्धु है ॥१०॥
Connotation: - हे मनुष्यो ! जब तुम ईश्वर की शरण में प्राप्त होगे, तब ही तुम्हारे सकल विघ्न दूर होंगे। ईश्वर को ही अपना समीपी सम्बन्धी और बन्धु समझो, उसके आश्रय में सदा वास करो ॥१०॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

यज्ञाग्नि व रोगकृमिरूप शत्रुविनाश

Word-Meaning: - [१] (यथा) = जैसे (शृंगे) = सींगों को (शिशानः) = तीक्ष्ण करता हुआ (वृषभः) = बैल (दविध्वत्) = शत्रुओं को कम्पित करता है, इसी प्रकार (अग्निः) = यज्ञाग्नि रोगकृमिरूप शत्रुओं को अपनी तीक्ष्ण ज्वालाओं से विनष्ट करता है। [२] (अस्य) = इस यज्ञाग्नि की (हनवः) = हनुस्थानीय ज्वालाएँ (तिग्मा:) = बड़ी तीक्ष्ण हैं । (न प्रतिधृषे) = शत्रुओं से इनका धर्षण नहीं हो सकता। यह अग्नि (सुजम्भ:) = उत्तम दंष्ट्रा ओंवाला है। (सहसः यहुः) = बल का पुञ्ज है। यह अग्नि बल का पुञ्ज होता हुआ सब शत्रुओं का विनाश करता है।
Connotation: - भावार्थ - यज्ञाग्नि बल का पुञ्ज हैं। यह ज्वालारूप दंष्ट्राओं से सब रोग कृमिरूप शत्रुओं को विनष्ट करता है।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे ईश ! विश्वस्मात्=सर्वस्मात्। रक्षसः=महादुष्टात्। अराव्णः=अदातुश्च। नोऽस्मान् पाहि। तथा वाजेषु=सांसारिकसंग्रामेषु च। नोऽस्मान्। प्राव=प्रकर्षेण रक्ष। स्मेति पूरणः। हे देव। नेदिष्ठं=सर्वेषां सन्निधौ आसन्नतमम्। आपिं बन्धुम्। त्वाम्+इत्+हि=त्वामेव हि। देवतातये वृधे च। नक्षामहे=प्राप्नुमः ॥१०॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Just as a bull whets and brandishes his horns against his rival, so does Agni shake his opponents. Fiery is his visor, strong his jaws, mighty his courage, he is invincible, uncounterable, irresistible.