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आ नो॑ अग्ने वयो॒वृधं॑ र॒यिं पा॑वक॒ शंस्य॑म् । रास्वा॑ च न उपमाते पुरु॒स्पृहं॒ सुनी॑ती॒ स्वय॑शस्तरम् ॥

English Transliteration

ā no agne vayovṛdhaṁ rayim pāvaka śaṁsyam | rāsvā ca na upamāte puruspṛhaṁ sunītī svayaśastaram ||

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Pad Path

आ । नः॒ । अ॒ग्ने॒ । व॒यः॒ऽवृध॑म् । र॒यिम् । पा॒व॒क॒ । शंस्य॑म् । रास्व॑ । च॒ । नः॒ । उ॒प॒ऽमा॒ते॒ । पु॒रु॒ऽस्पृह॑म् । सुऽनी॑ती । स्वय॑शःऽतरम् ॥ ८.६०.११

Rigveda » Mandal:8» Sukta:60» Mantra:11 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:34» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:7» Mantra:11


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (यविष्ठ्य) हे युवतम सदा एकरस हे सर्वाधारदेव ! तू (नः) हमको (रिपवे+मर्ताय) शत्रुजन के निकट शिकार के लिये (मा+रीरधः) मत फेंक तथा (अघशंसाय) पापीजन के निकट (मा) हमको मत लेजा किन्तु तू (पायुभिः) पालकजनों के साथ हमको रख कर (पाहि) बचा। (अस्रेधद्भिः) जो जन अहिंसक हों (तरणिभिः) दुःखों से तारक हों और (शिवेभिः) सदा कल्याण चाहनेवाले हों, ऐसे पुरुषों के सङ्ग में हमको रख ॥८॥
Connotation: - हे मनुष्यो ! दुर्जनों का सङ्ग छोड़ उत्तम पुरुषों के साथ वास और संवाद करो ॥८॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'वयोवृधं शंस्यम्' रयिम्

Word-Meaning: - [१] (उपमाते) = सब ऐश्वर्यों के देनेवाले (अग्ने) = प्रभो ! आप (नः) = हमारे लिए (रयिं) = धन को (आरास्व) = सब ओर से दीजिए। उस धन को जो (वयोवृधम्) = हमारी आयु की वृद्धि का कारण बने (च) = और (शंस्यम्) = प्रशंसनीय हो। [२] हे पावक पवित्र करनेवाले प्रभो ! (नः) = हमारे लिए उस धन को दीजिए, जो (पुरुस्पृमहं) = बहुत ही स्पृहणीय हो तथा (सुनीति) = शुभनीतिमार्ग से कमाया जाकर (स्वयशस्तरम्) = अपनी कीर्ति को बढ़ानेवाले हो ।
Connotation: - भावार्थ:- प्रभु का स्मरण करते हुए हम शुभनीतिमार्ग से उस धन का अर्जन करें जो हमारे आयुष्य को बढ़ाए तथा प्रशंसनीय, स्पृहणीय व यशस्वी बनानेवाला हो ।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे सर्वाधार देव ! नोऽस्मान्। रिपवे=शत्रवे। मर्ताय=मर्त्याय मनुष्याय। हन्तुं मा रीरधः=मा समर्पय। अघशंसाय=पापाय जनाय च मा रीरधः। किन्तु हे यविष्ठ्य=हे युवतम ! सदैकरस ! पायुभिः=पालनैः पालकैर्जनैर्वा अस्मान् पाहि। कीदृशैः। अस्रेधद्भिः=अहिंसकैः। तरणिभिः=तरकैः। पुनः। शिवेभिः=मङ्गलविधायकैः ॥८॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, saviour and purifier of life, closest and friendly, give us wealth which is admirable and leads to progress in food, health and age and cattle wealth. Give us the way of life leading to universally loved wealth, honour and excellence, renowned and rising.