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नि॒ष्षिध्व॑री॒रोष॑धी॒राप॑ आस्ता॒मिन्द्रा॑वरुणा महि॒मान॒माश॑त । या सिस्र॑तू॒ रज॑सः पा॒रे अध्व॑नो॒ ययो॒: शत्रु॒र्नकि॒रादे॑व॒ ओह॑ते ॥

English Transliteration

niṣṣidhvarīr oṣadhīr āpa āstām indrāvaruṇā mahimānam āśata | yā sisratū rajasaḥ pāre adhvano yayoḥ śatrur nakir ādeva ohate ||

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Pad Path

निः॒ऽसिध्व॑रीः । ओष॑धीः । आपः॑ । आ॒स्ता॒म् । इन्द्रा॑वरुणा । म॒हि॒मान॑म् । आ॒श॒त॒ । या । सिस्र॑तुः । रज॑सः । पा॒रे । अध्व॑नः । ययोः॑ । शत्रुः॑ । नकिः॑ । अदे॑वः । ओह॑ते ॥ ८.५९.२

Rigveda » Mandal:8» Sukta:59» Mantra:2 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:30» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:2


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वानस्पतिक भोजन

Word-Meaning: - [१] हमारे शरीरों में (ओषधीः आपः) = ओषधियाँ व जल (निषिध्वरीः आस्ताम्) = सब रोगों व वासनाओं का निषेध करनेवाली हों। शुद्ध जल व वानस्पतिक भोजन शरीर को व्याधिशून्य तथा मन को आधिशून्य बनाए। इस शरीर में (इन्द्रावरुणा) = जितेन्द्रियता व निर्देषता के भाव (महिमानम् आशत) = महिमा को त्याप्त करनेवाले हों। जितेन्द्रियता व निर्देषता के कारण हमारा जीवन महिमाशाली हो। [२] वे इन्द्र और वरुण महिमा को व्याप्त करते हैं (या) = जो (रजसः अध्वनः) = इस लोकमार्ग के (पारे) = पार (सिस्रतु) = गतिवाले होते हैं। वस्तुतः इस जीवनयात्रा में हमें जितेन्द्रियता व निर्देषता ही मार्ग के अन्त तक पहुँचानेवाली होती हैं। ये इन्द्र और वरुण वे हैं (यो:) = जिनका (शत्रुः) = शत्रु (आत् नकिः) = निश्चय से नहीं ही ओहते प्राप्त होता। जितेन्द्रियता व निर्दोषता हमें सब शत्रुओं से रहित करके जीवनयात्रा को पूर्ण करने में सहायक होती हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम वानस्पतिक भोजन व शुद्ध जल को अपना खान-पान बनाकर जितेन्द्रिय व निर्देष बनें और जीवनयात्रा को निर्विघ्न पूर्ण कर सकें।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Indra and Varuna, powers of natural energy and natural selection for evolution and growth, herbs and trees, waters and liquid flows attain efficiency and rise higher in munificence when you cross the paths across the skies, come and vibrate, and there is no defiling power in operation to negate your efficacy.