Word-Meaning: - [१] गतमन्त्र में सैकड़ों सूर्यों का उल्लेख था । इस सूर्य की किरणें ही (शतं वेणून्) = सैकड़ों वेणुओं को धारण करती हैं। वेणु यहाँ वनस्पति का प्रतीक है- वनस्पति मात्र को ये सूर्य किरणें ही धारण करती हैं। (शतं शुनः) = सैकड़ों कुत्तों को ये धारण करती हैं। 'श्वा' शब्द यहाँ पशुओं का प्रतीक हैं। (शतं) = सैकड़ों प्रकार के (म्लातानि) = कमाये हुए (चर्माणि) = चमड़े इन सूर्यकिरणों द्वारा ही प्राप्त कराये जाते हैं। प्रत्येक पशु का चर्म अलग-अलग ही प्रकार का है। [२] प्रभु ने (मे) = मेरे लिए (शतं) = सैकड़ों (बल्बजस्तुका) = तृणों के गुच्छों का निर्माण किया है। (अरुषीणां चतुःशतम्) = आरोचमान ज्वालाओं के भी चार सौ भेद हैं। ज्वालाएँ भी भिन्न-भिन्न प्रकार की हैं।
Connotation: - भावार्थ-प्रभु ने हमारे उपयोग के लिए इस विविध सृष्टि का निर्माण किया है। नाना प्रकार की वनस्पतियाँ, नाना पशु, तथा नाना प्रकार के चमड़े व तृणगुच्छ तथा नाना प्रकार की ज्वालाएँ प्रभु द्वारा निमत्त हुई हैं।