Go To Mantra
Viewed 375 times

अस्ता॑वि॒ मन्म॑ पू॒र्व्यं ब्रह्मेन्द्रा॑य वोचत । पू॒र्वीॠ॒तस्य॑ बृह॒तीर॑नूषत स्तो॒तुर्मे॒धा अ॑सृक्षत ॥

English Transliteration

astāvi manma pūrvyam brahmendrāya vocata | pūrvīr ṛtasya bṛhatīr anūṣata stotur medhā asṛkṣata ||

Mantra Audio
Pad Path

अस्ता॑वि । मन्म॑ । पू॒र्व्यम् । ब्रह्म॑ । इन्द्रा॑य । वो॒च॒त॒ । पू॒र्वीः । ऋ॒तस्य॑ । बृ॒ह॒तीः । अ॒नू॒ष॒त॒ । स्तो॒तुः । मे॒धाः । अ॒सृ॒क्ष॒त॒ ॥ ८.५२.९

Rigveda » Mandal:8» Sukta:52» Mantra:9 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:21» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:9


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

वेदवाणी द्वारा बुद्धिवर्धन

Word-Meaning: - [१] (पूर्व्यं) = पालन व पूरण करने में उत्तम (मन्म) = मननीय स्तोत्र (अस्तावि) = हमारे से स्तुत होता है। हम प्रभु का विचारपूर्वक स्तवन करते हैं- यह स्तवन हमारी लक्ष्यदृष्टि को पैदा करता हुआ हमारा पूरण करता है। (इन्द्राय) = उस परमैश्वर्यशाली प्रभु की प्राप्ति के लिए (ब्रह्म वोचत) = ज्ञान की वाणियों का उच्चारण करो। [२] (ऋतस्य) = सत्य ज्ञान की (पूर्वी:) = सृष्टि के प्रारम्भ में दी जानेवाली (बृहती:) = ये वर्धन की हेतुभूत वाणियाँ (अनूपत) = हमारे से स्तुत होती हैं। इस वेदवाणी के स्तवन से (स्तोतुः) = स्तवन करनेवाले की (मेधाः) = बुद्धियाँ (असृक्षत) = सृष्ट होती हैं। वेदवाणियों का अध्ययन बुद्धियों की वृद्धि का कारण बनता है।
Connotation: - भावार्थ- हम प्रभु का स्तवन करें। प्रभुप्राप्ति के लिए ज्ञान की वाणियों का उच्चारण करें। ये वेदवाणियाँ हमारी बुद्धि का वर्धन करनेवाली होती हैं।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Eternal and adorable song of divine praise has been presented. Chant that for Indra, the divine soul. Sing the grand old hymns of divine law and glorify the lord. Inspire and augment the mind and soul of the celebrant.