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पा॒र्ष॒द्वा॒णः प्रस्क॑ण्वं॒ सम॑सादय॒च्छया॑नं॒ जिव्रि॒मुद्धि॑तम् । स॒हस्रा॑ण्यसिषास॒द्गवा॒मृषि॒स्त्वोतो॒ दस्य॑वे॒ वृक॑: ॥

English Transliteration

pārṣadvāṇaḥ praskaṇvaṁ sam asādayac chayānaṁ jivrim uddhitam | sahasrāṇy asiṣāsad gavām ṛṣis tvoto dasyave vṛkaḥ ||

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Pad Path

पा॒र्ष॒द्वा॒णः । प्रस्क॑ण्वम् । सम् । अ॒सा॒द॒य॒त् । शया॑नम् । जिव्रि॑म् । उद्धि॑तम् । स॒हस्रा॑णि । अ॒सि॒सा॒स॒त् । गवा॑म् । ऋषिः॑ । त्वाऽऊ॑तः । दस्य॑वे । वृकः॑ ॥ ८.५१.२

Rigveda » Mandal:8» Sukta:51» Mantra:2 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:18» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:2


HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

दस्यवे वृकः

Word-Meaning: - [१] (पार्षद्वाणः) = ज्ञान की वाणियों को देनेवाला प्रभु (प्रस्कण्वं) = मेधावी को मेधावी के लिए (शयानं) = सर्वत्र निवास करनेवाले (जिव्रिम्) = सनातन पुराण (उद्धितम्) = उत्कृष्ट हित करनेवाले प्रभु को (समसादयत्) = प्राप्त कराते हैं। प्रभुकृपा से ही एक मेधावी पुरुष प्रभु का दर्शन करता है। [२] (गवां) = इन ज्ञान की वाणियों का (ऋषिः) = तत्त्वद्रष्टा व्यक्ति (सहस्त्राणि) = सहस्रों धनों का (असिषासद्) = संभजन करनेवाला होता है। हे प्रभो ! (त्वा ऊतः) आपसे रक्षित किया गया यह व्यक्ति (दस्यवे) = विनाशक वृत्ति के लिए [दसु उपक्षये] (वृकः) = भेड़िये के समान होता है, अर्थात् इन दास्यव वृत्तियों को समाप्त करनेवाला होता है।
Connotation: - भावार्थ- प्रभुकृपा से हमें ज्ञान प्राप्त होता है। इस ज्ञान से ही हम प्रभुदर्शन कर पाते हैं। प्रभु से रक्षित होकर हम दास्यव भावनाओं को समाप्त करनेवाले होते हैं।

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - When debility of mind and speech took over the old, unsettled and depressed intellectual, then the sage, inspired and strengthened by you as a thunderbolt made him sit in a thousand rays of the sun for treatment and cure.