उत्तम शरीर, उत्तम मस्तिष्क व मोक्षलोक
Word-Meaning: - [१] हे (इन्द्र) = परमैश्वर्यशालिन् प्रभो ! (यत्) = जो आप हैं, वे (ह) = निश्चय से (नूनं) = शीघ्र [Immedi- ate] (परावति) = उस सुदूर मोक्षलोक के निमित्त (यद् वा) = अथवा (पृथिव्यां) = इस शरीररूप पृथिवी के निमित्त, (दिवि) = मस्तिष्करूप द्युलोक के निमित्त (हरिभिः) = इन्द्रियाश्वों के द्वारा शरीररथ को (युजान:) = जोतते हुए (आगहि) = हमें प्राप्त होइये। आप से प्राप्त कराई गई ये इन्द्रियाँ ही हमें 'उत्तम शरीर उत्तम मस्तिष्क व मोक्षलोक' को प्राप्त कराने का साधन बनती हैं। [२] हे (महेमते) = महान् बुद्धिवाले व (ऋष्व) = सर्वोत्तम प्रभो! आप (ऋष्वेभिः) = महत्त्वपूर्ण उत्कृष्ट इन्द्रियों के साथ हमें प्राप्त होइये । आपसे प्राप्त कराई गई ये उत्कृष्ट इन्द्रियाँ ही हमें उत्कृष्ट लोक को प्राप्त करानेवाली होंगी।
Connotation: - भावार्थ- हे प्रभो! आप हमें उत्कृष्ट इन्द्रियाँ प्राप्त कराइये। इनके द्वारा ठीक मार्ग का आक्रमण करते हुए हम शरीर व मस्तिष्क को उत्कृष्ट बनाकर मोक्षलोक को प्राप्त करेंगे।