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ता मे॑ अश्विना सनी॒नां वि॒द्यातं॒ नवा॑नाम् । यथा॑ चिच्चै॒द्यः क॒शुः श॒तमुष्ट्रा॑नां॒ दद॑त्स॒हस्रा॒ दश॒ गोना॑म् ॥

English Transliteration

tā me aśvinā sanīnāṁ vidyātaṁ navānām | yathā cic caidyaḥ kaśuḥ śatam uṣṭrānāṁ dadat sahasrā daśa gonām ||

Pad Path

ता । मे॒ । अ॒श्वि॒ना॒ । स॒नी॒नाम् । वि॒ध्यात॑म् । नवा॑नाम् । यथा॑ । चि॒त् । चै॒द्यः । क॒शुम् । श॒तम् । उष्ट्रा॑नाम् । दद॑त् । स॒हस्रा॑ । दश॑ । गोना॑म् ॥ ८.५.३७

Rigveda » Mandal:8» Sukta:5» Mantra:37 | Ashtak:5» Adhyay:8» Varga:8» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:1» Mantra:37


SHIV SHANKAR SHARMA

ईश्वर की उपासना का फल कहते हैं।

Word-Meaning: - (अश्विना) हे अश्वयुक्त राजन् तथा न्यायाधीशादि ! (ता) वे आप (मे) मेरी (नवानाम्) नवीन (सनीनाम्) प्राप्तियों के सम्बन्ध में (विद्यातम्) इस प्रकार जानें (यथा+चित्) कि (चैद्यः१) पञ्चज्ञानेन्द्रियजन्य (कशुः) विवेक ने मुझको (उष्ट्राणाम्+शतम्) एकसौ १०० ऊँट और (गोनाम्+दश+सहस्रा) दशसहस्र १०००० गाएँ (ददद्) दी हैं ॥३७॥
Connotation: - विद्यादि गुणसम्पन्न विवेकी पुरुष बहुत धनसंचय कर सकते हैं, अतः हे मनुष्यों ! गुणों का उपार्जन करो, विद्या, उद्योग और व्यापारादिकों से जो कुछ प्राप्त हो, उसकी वार्ता राजा के निकट पहुँचा देवे, ताकि राजा को चोरी आदि का सन्देह न हो ॥३७॥
Footnote: १−चैद्य (चेतन्ति) ज्ञानेन्द्रिय के शब्द, स्पर्श, रूप, रस और गन्ध ये पाँचों विषय हैं, इनको ज्ञानेन्द्रिय जानते हैं या इनके द्वारा आत्मा को विषयों का ज्ञान होता है, अतः इनको चेति कहते हैं, चेति को ही चेदि कहते हैं। इन ज्ञानेन्द्रियों से जो उत्पन्न हो, वह चैद्य है ॥३७॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (ता, अश्विना) ज्ञानयोगिन् तथा कर्मयोगिन् ! आप (नवानाम्) नित्यनूतन (सनीनाम्) सम्भजनीय पदार्थों को (मे) मेरे लिये (विद्यातम्) ज्ञात करें (यथाचित्) जिस प्रकार (चैद्यः, कशुः) ज्ञानवान् शासनकर्त्ता (उष्ट्राणाम्, शतम्) सौ उष्ट्र और (दश, सहस्रा) दस हज़ार (गोनाम्) गौएँ (ददत्) मुझे दे ॥३७॥
Connotation: - इस मन्त्र में यजमान की ओर से कथन है कि हे ज्ञानयोगिन् तथा कर्मयोगिन् ! आप उत्तमोत्तम नूतन पदार्थ मेरे लिये ज्ञात करें=जानें अर्थात् प्रदान करें। हे सबके शासक प्रभो ! आप मुझको सौ ऊँट और दश सहस्र गौओं का दान दें, जिससे मेरा यज्ञ सर्वाङ्गपूर्ण हो ॥३७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

चैद्यः कशुः

Word-Meaning: - [१] (ता अश्विना) = वे प्राणापान मे मेरे लिये (नवानाम्) = स्तुत्य [ नु स्तुतौ] (सनीनाम्) = प्राप्तियों का (विद्यातम्) = ज्ञान दें। इन प्राणापान की साधना से मुझे अन्नमय आदि सब कोशों का उत्तम ऐश्वर्य प्राप्त हो। [२] प्राणापान का ऐसा अनुग्रह हो कि (यथा) = जिस से (चित्) = निश्चयपूर्वक (चैद्यः) = [चित् एव चैद्यः] ज्ञानस्वरूप कशुः - [कश गतिशासनयोः] सर्वत्र क्रियावाला सर्वशासक प्रभु शतम् - शतवर्षपर्यन्त उष्ट्रानाम् = [उष् दाहे] दोषदहन शक्तियों का ददत्-देनेवाला हो तथा गोनाम् = इन ज्ञान की वाणियों के दश सहस्त्रा दस हजारों को [ऋग्वेदस्थ १० हजार मन्त्रों को] वे प्रभु हमारे लिये देनेवाले हों। यह ज्ञानाग्नि ही तो कर्म-दोषों को भस्म करके उन्हें पवित्र करेगी।
Connotation: - भावार्थ- प्राणापान की साधना से सब कोशों का ऐश्वर्य प्राप्त हो। शतवर्षपर्यन्त दोषदहन शक्ति मिले। तथा कर्मदोषों को भस्म करनेवाली ज्ञान-वाणियाँ प्राप्त हों।

SHIV SHANKAR SHARMA

ईश्वरोपासनफलमाह।

Word-Meaning: - हे अश्विना=अश्विनौ। ता=तौ युवाम्। मे=मम। नवानाम्=नवीनानां सम्प्रत्येव प्राप्तानाम्। सनीनाम्=विविधप्राप्तीनाम्। सम्बन्धे। इदम्। विद्यातम्=जानीतम्। यथाचित्=यथाहि। चैद्यः=चेदयः सुशिक्षितानि पञ्चज्ञानेन्द्रियाणि। चेतन्ति संजानन्ति स्वं स्वं विषयमिति चेतयः। व्यत्ययेन चेतय एव चेदयः। तेभ्यो जातश्चैद्यः। कशुर्विवेकः=काशते प्रकाशत इति कशुः। उष्ट्राणां शतम्। गोनां गवाम्। दशसहस्रा=सहस्राणि। ददत्=दत्तवान् इति युवां जानीतम् ॥३७॥

ARYAMUNI

Word-Meaning: - (ता, अश्विना) तादृशौ ज्ञानयोगिकर्मयोगिणौ ! (नवानाम्) नूतनानाम् (सनीनाम्) संभजनीयपदार्थानाम् (मे) मह्यम् (विद्यातम्) जानीयाथाम् “कर्मणि षष्ठी” (यथाचित्) येन प्रकारेण (चैद्यः, कशुः) विद्वान् शासकः (उष्ट्राणाम्, शतम्) क्रमेलकाः शतम् (गोनाम्) गवाम् (दश, सहस्रा) दशसहस्राणि (ददत्) दद्यात् ॥३७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Such as you are, Ashvins, harbingers of the sweets of life, please know the newest and most favourite gifts I love just as the perceptive ruler knew when he granted me a hundred camels and ten thousand cows.