प्राणसाधना व सात्विक भोजन
Word-Meaning: - [१] हे (अमर्त्या अश्विना) = हमें न मरने देनेवाले प्राणापानो! आप (दासीः) = रोगों का उपक्षय करनेवाले (पूर्वीः) = हमारा पालन व पूरण करनेवाले (इषः) = अन्नों को अश्वन्तौ खाते हुए इन 'अनमीव शुष्मी' नीरोगता को देनेवाले व शक्ति का पूरण करनेवाले अन्नों का सेवन करते (पराकात्) = दूरदेश से भी (आवहेथे) = लक्ष्य-स्थान पर पहुँचाते हो। [२] प्राणसाधना के साथ 'युक्ताहार-विहार' भी अत्यन्त आवश्यक है, भोजन के अतियम से प्राणसाधना लाभप्रद नहीं रहती । नीरोगता को देनेवाले व शक्ति का पूरण करनेवाले अन्नों का सेवन आवश्यक है। इस प्रकार भोजन के नियम के साथ प्राणसाधना चली तो यह हमें अवश्य लक्ष्य स्थान पर पहुँचायेगी। चाहे हम कितना भी लक्ष्य से दूर हों, यह साधना हमें उन्नत करते हुए लक्ष्य पर पहुँचायेगी ही ।
Connotation: - भावार्थ- हम प्राणसाधना में प्रवृत्त हों। इस साधना के साथ भोजन का भी नियम रखें। ऐसा करने पर हम कितना भी दूर हों, अवश्य लक्ष्य स्थान पर पहुँचेंगे ही।