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यु॒ष्मे दे॑वा॒ अपि॑ ष्मसि॒ युध्य॑न्त इव॒ वर्म॑सु । यू॒यं म॒हो न॒ एन॑सो यू॒यमर्भा॑दुरुष्यताने॒हसो॑ व ऊ॒तय॑: सु॒तयो॑ व ऊ॒तय॑: ॥

English Transliteration

yuṣme devā api ṣmasi yudhyanta iva varmasu | yūyam maho na enaso yūyam arbhād uruṣyatānehaso va ūtayaḥ suūtayo va ūtayaḥ ||

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Pad Path

यु॒ष्मे इति॑ । दे॒वाः॒ । अपि॑ । स्म॒सि॒ । युध्य॑न्तःऽइव । वर्म॑सु । यू॒यम् । म॒हः । नः॒ । एन॑सः । यू॒यम् । अर्भा॑त् । उ॒रु॒ष्य॒त॒ । अ॒ने॒हसः॑ । वः॒ । ऊ॒तयः॑ । सु॒ऽऊ॒तयः॑ । वः॒ । ऊ॒तयः॑ ॥ ८.४७.८

Rigveda » Mandal:8» Sukta:47» Mantra:8 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:8» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:8


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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (यथा) जैसे (रथ्यः) रथी=सारथी (दुर्गाणि) दुर्गम, ऊँच-नीच मार्गों को छोड़ देता है, तद्वत् (नः) हम मनुष्यों को (अघा) पाप रोग अकिंचनता इत्यादि क्लेश (परि+वृणजन्) छोड़ देवें अर्थात् हमारे निकट क्लेश न आने पावें, इसके लिये (इन्द्रस्य) परमात्मा या सभापति के (शर्मणि) मङ्गलमय शरण में (स्याम+इत्) सदा निवास करें तथा (आदित्यानाम्) सभासदों के (अवसि) रक्षण और साहाय्य में सदा स्थित रहें। (अनेहसः) इत्यादि पूर्ववत् ॥५॥
Connotation: - हम लोग सदा ईश्वर आचार्य्य, गुण, श्रेष्ठजन तथा धर्मात्मा सभासदों के संगम में निवास करें, जिससे न पाप और न आपत्तियाँ हमारे निकट आवें ॥५॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

देव-संग

Word-Meaning: - [१] हे (देवाः) = देवो! दिव्य वृत्तिवाले पुरुषो! (युष्मे अपि ष्मसि) = आपमें हम अपिहित ढके हुए हों। आपमें हम इस प्रकार सुरक्षित हों, (इव) = जैसे (युध्यन्त:) = युद्ध करते हुए लोग (वर्मसु) = कवचों में सुरक्षित होते हैं। कवच जिस प्रकार शस्त्रों के घात से हमें बचाता है, उसी प्रकार देव हमारा रक्षण करते हैं। [२] हे देवो! (यूयं) = आप (नः) = हमें (महः एनसः) = महान् पापों से (उरुष्यत) = बचाते हो । (यूयं) = आप ही हमें अर्थात्-छोटे पापों से रक्षित करते हो। (वः) = आपके (ऊतयः) = रक्षण (अनेहस:) = हमें निष्पाप बनानेवाले हैं। (वः ऊतयः) = आपके रक्षण (सु ऊतयः) = उत्तम रक्षण है। सत्संग हमें सब प्रकार से पापों के आक्रमण से बचाता है। [३] यहाँ इस सूक्त में १८ बार ('अनेहसो व ऊतयः') = कहा गया है। १८ ही व्यसन हैं। १० कामज, ८ क्रोधज। इन सब व्यसनों से यह सत्संग हमारा रक्षण करता है। जीवित पुरुषों के सत्संग की तरह ही दिवंगत पुरुषों का संग भी उनके ग्रन्थों के अध्ययन द्वारा प्राप्त होता है। यह संग सर्वोत्तम संग है।
Connotation: - भावार्थ- देव पुरुषों का संग हमें सब पापों के आक्रमण से बचाता है। -
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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - यथा। रथ्यः=रथी। दुर्गाणि=दुर्गमान् दुष्टमार्गान् त्यजति। तथैव। नोऽस्मान्। अघा=अघानि पापानि। परि वृणजन्=परिवर्जयन्तु। त्यजन्तु। तदर्थम्। वयम्। इन्द्रस्य परमात्मनः सभापतेर्वा। शर्मणि। स्यामेत् स्यामैव। आदित्यानां सभासदानाम्। उत। अवसि=रक्षणे। स्याम ॥५॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Brilliant and brave Adityas, in you we are safe like warriors in armour. You save us from heinous sins and major crimes, you save us from minor faults and lighter trespasses. Sinless are your protections and holy and noble your safegurards.