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यथा॑ क॒लां यथा॑ श॒फं यथ॑ ऋ॒णं सं॒नया॑मसि । ए॒वा दु॒ष्ष्वप्न्यं॒ सर्व॑मा॒प्त्ये सं न॑यामस्यने॒हसो॑ व ऊ॒तय॑: सु॒तयो॑ व ऊ॒तय॑: ॥

English Transliteration

yathā kalāṁ yathā śaphaṁ yatha ṛṇaṁ saṁnayāmasi | evā duṣṣvapnyaṁ sarvam āptye saṁ nayāmasy anehaso va ūtayaḥ suūtayo va ūtayaḥ ||

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Pad Path

यथा॑ । क॒लाम् । यथा॑ । श॒फम् । यथा॑ । ऋ॒णम् । स॒म्ऽनया॑मसि । ए॒व । दुः॒ऽस्वप्न्य॑म् । सर्व॑म् । आ॒प्त्ये । सम् । न॒या॒म॒सि॒ । अ॒ने॒हसः॑ । वः॒ । ऊ॒तयः॑ । सु॒ऽऊ॒तयः॑ । वः॒ । ऊ॒तयः॑ ॥ ८.४७.१७

Rigveda » Mandal:8» Sukta:47» Mantra:17 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:10» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:17


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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (दिवः+दुहितः) हे दिवः कन्ये ! बुद्धे ! यद्वा हे उषो देवि ! (यद्+दुःस्वप्न्यम्) जो दुःस्वप्न=अनिष्टसूचक स्वप्न (गोषु) इन्द्रियों में होता है अर्थात् इन्द्रियों के सम्बन्ध में होता है (यत्+च) और जो दुष्ट स्वप्न (अस्मे) हमारे अन्यान्य अवयवों के सम्बन्ध में होता है (विभावरि) हे प्रकाशमय देवि मते ! (तत्) उस सब दुःस्वप्न को (आप्त्याय+त्रिताय) व्यापक जगत् के लिये (परा+वह) कहीं दूर फेंक देवें ॥१४॥
Connotation: - जाग्रदवस्था में अनुभूत पदार्थ स्वप्नावस्था में दृष्ट होते हैं। प्रातःकाल लोग अधिक स्वप्न देखते हैं। अतः उषा देवी का सम्बोधन किया गया है। यद्वा (दिवः+दुहिता) प्रकाश की कन्या बुद्धि है, क्योंकि इसी से आत्मा को प्रकाश मिलता है। अतः बुद्धि सम्बोधित हुई है। स्वप्न से किसी प्रकार का भय करना उचित नहीं, अतः बुद्धि से कहा जाता है कि स्वप्न को दूर करो ॥१४॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ऋण आदि की तरह अशुभ स्वप्न अपसारण

Word-Meaning: - [१] (यथा) = जैसे (कलां) = काल के एक-एक अवयव को हम (संनयामसि) = व्यतीत करते हैं, (यथा शफं) = जैसे एक-एक पद [चरण] को रखते हुए हम मार्ग को पार कर लेते हैं (यथ ऋणं) = जैसे थोड़ा-थोड़ा करके हम ऋण को समाप्त कर लेते हैं, (एवा) = इसी प्रकार (आप्त्ये) = विद्वान् पुरुष की समीपता में हम (सर्वं दुष्ष्वप्न्यं) = सब अशुभ स्वप्न को समाप्त करते हैं। धीरे-धीरे अपने जीवन को सुन्दर बनाते हुए अशुभ स्वप्नों से ऊपर उठते हैं। [२] हे देवो ! (वः ऊतयः) = आपके रक्षण (अनेहसः) = हमें निष्पाप बनाते हैं। (वः ऊतयः) = आपके रक्षण (सु ऊतयः) = उत्तम रक्षण हैं।
Connotation: - भावार्थ- हम ज्ञानियों के सम्पर्क में थोड़ा-थोड़ा आगे बढ़ते हुए उन्नत जीवनवाले बनकर अशुभ स्वप्नों से दूर हों ।
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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे दिवो दुहितः=दिवः प्रकाशस्य दुहितः कन्ये बुद्धे ! यद्वा उषः। गोषु अस्माकमिन्द्रियेषु। यच्च दुःस्वप्न्यं=अमङ्गलसूचकः स्वप्नो भवति। अस्मे=अस्मासु अस्माकमन्यावयवेषु। यच्च दुःखं स्वप्न्यं विद्यते। हे विभावरि=हे प्रकाशमयि देवि बुद्धे ! तत्सर्वं दुःस्वप्न्यम्। आप्त्याय। त्रिताय। परावह=दूरे परिहर ॥१४॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Just as we throw off a dead nail and a dead hoof, and just as we pay off a bad debt, similarly we throw off tall bad dreams of our whole world far away. O Adityas, O dawn of light, sinless are your protections, holy your safeguards.