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तमिन्द्रं॒ दान॑मीमहे शवसा॒नमभी॑र्वम् । ईशा॑नं रा॒य ई॑महे ॥

English Transliteration

tam indraṁ dānam īmahe śavasānam abhīrvam | īśānaṁ rāya īmahe ||

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Pad Path

तम् । इन्द्र॑म् । दान॑म् । ई॒म॒हे । श॒व॒सा॒नम् । अभी॑र्वम् । ईशा॑नम् । रा॒यः । ई॒म॒हे॒ ॥ ८.४६.६

Rigveda » Mandal:8» Sukta:46» Mantra:6 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:2» Mantra:1 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:6


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (शतमूते) हे अनन्त प्रकार से रक्षाकारक (शतक्रतो) हे अनन्तकर्मसंयुक्त महाकर्मन् देव ! (यस्य+ते) जिस तेरे (महिमानम्) महिमा को (कारवः) स्तुतिकर्त्तृगण (गीर्भिः) अपने-२ गद्य पद्यमय वचनों से (गृणन्ति) गाते हैं ॥३॥
Connotation: - अच्छे विद्वान् स्तुतिपाठक और अन्यान्य आचार्य्यगण उसी की स्तुति करते हैं, अतः हे मनुष्यों ! आप भी उसी की महिमा गाओ ॥३॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

इन्द्रं दानम् ईमहे [शवसानम्, अभीर्वम्]

Word-Meaning: - [१] (तम्) = उस (इन्द्रं) = परमैश्वर्यशाली प्रभु से (दानं) = उस धन को दान की (ईमहे) = याचना करते हैं जो हमारे जीवन में (शवसानम्) = बल की तरह आचरण करता है जो धन हमें बलवान् बनाता है तथा (अभीर्वम्) = हमें निडर बनाता है। [२] उस (ईशानं) = ईश से स्वामी से ही हम (रायः) = दान देने योग्य धनों को मांगते हैं। हम उन धनों की याचना करते हैं, जो लोकहित के लिए दान में विनियुक्त होते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु से हम उस धन की याचना करते हैं जोकि हमें [क] सबल बनाएँ, [ख] अभीरु बनाएँ, तथा [ग] दान में विनियुक्त हो ।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे शतमूते ! शतमनन्तम् ऊतयो रक्षा यस्य स शतमूतिः तस्य सम्बोधने। हे शतक्रतो भगवन् ! यस्य ते महिमानम्। कारवः=कर्त्तारः स्तोत्राणाम्। गीर्भिः=वचनैः। गृणन्ति=स्तुवन्ति ॥३॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - We pray to Indra, omnipotent and fearless lord ruler of the world, for the gift of wealth, honour and excellence.