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ग॒व्यो षु णो॒ यथा॑ पु॒राश्व॒योत र॑थ॒या । व॒रि॒व॒स्य म॑हामह ॥

English Transliteration

gavyo ṣu ṇo yathā purāśvayota rathayā | varivasya mahāmaha ||

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Pad Path

ग॒व्यः॑ । सु । नः॒ । यथा॑ । पु॒रा । अ॒श्व॒ऽया । उ॒त । र॒थ॒ऽया । व॒रि॒व॒स्य । म॒हा॒ऽम॒ह॒ ॥ ८.४६.१०

Rigveda » Mandal:8» Sukta:46» Mantra:10 | Ashtak:6» Adhyay:4» Varga:2» Mantra:5 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:10


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे मनुष्यों ! (तस्मिन्) उस इन्द्रवाच्य जगदीश में (विश्वाः) समस्त (अभीरवः) अकातर=निर्भय (ऊतयः) रक्षाएँ (सचा+सन्ति) समवेत हैं अर्थात् विद्यमान हैं, (तम्) उस (पुरूवसुम्) बहुधन और सर्वधन ईश्वर को (सप्तयः) संचलनशील (हरयः) ये सम्पूर्ण संसार (मदाय) आनन्द के लिये (सुतम्) इस यज्ञ में (आवहन्तु) प्रकाशित करें ॥७॥
Connotation: - परमात्मा में सब रक्षाएँ विद्यमान हैं, इसका आशय यह है कि वही सब रक्षा कर सकता है। उसको ये संसार प्रकट कर सकते हैं ॥७॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

गव्या+अश्वया+रथया

Word-Meaning: - [१] हे (महामह) = महान् प्रकाशवाले प्रभो! आप (नः) = हमें (यथा पुरा) = जैसे पहले युगों में उसी प्रकार (गव्या) = ज्ञानेन्द्रिय समूह को देने की कामना से, (उ) = और (अश्वया) = उत्तम कर्मेन्द्रियों को प्राप्त कराने की कामना से (उत) = और (रथया) = उत्तम शरीररथ को प्राप्त कराने की कामना से (सुवरिवस्य) = सम्यक् आदृत करिये। [२] प्रभुद्वारा उत्तम ज्ञानेन्द्रियों, उत्तम कर्मेन्द्रियों व उत्तम शरीररथ का प्राप्त कराया जाना ही हमारा महान् आदर है।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु हमें उत्तम ज्ञानेन्द्रियाँ, उत्तम कर्मेन्द्रियाँ व उत्तम शरीररूप रथ प्राप्त कराते हैं। इनका ठीक प्रयोग हमें भी महान् प्रकाशवाला बनाता है।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे मनुष्याः ! तस्मिन्निन्द्रे। विश्वाः=सर्वाः। अभीरवः=निर्भयाः। ऊतयो रक्षाः। सचा सन्ति=सह भवन्ति। तं पुरूवसुम्=बहुधनमिन्द्रम्। सप्तयः= सर्पणशीलाः। हरयः=इमे संसाराः। मदाय=आनन्दाय। सुतम्=यज्ञम्। आवहन्तु ॥७॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Lord greatest of the great, Indra, come now as ever before and bring us wealth of lands and cows and discipline of the mind and senses, wealth of horses, progress and meaningful attainments, and scientific transports and spiritual adventures of the soul in meditation and yajnic sessions.