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ऋ॒भु॒क्षणं॒ न वर्त॑व उ॒क्थेषु॑ तुग्र्या॒वृध॑म् । इन्द्रं॒ सोमे॒ सचा॑ सु॒ते ॥

English Transliteration

ṛbhukṣaṇaṁ na vartava uktheṣu tugryāvṛdham | indraṁ some sacā sute ||

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Pad Path

ऋ॒भु॒क्षण॑म् । न । वर्त॑वे । उ॒क्थेषु॑ । तु॒ग्र्य॒ऽवृध॑म् । इन्द्र॑म् । सोमे॑ । सचा॑ । सु॒ते ॥ ८.४५.२९

Rigveda » Mandal:8» Sukta:45» Mantra:29 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:47» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:29


SHIV SHANKAR SHARMA

इन्द्र संसार का संहार भी करता है, यह इससे दिखलाते हैं।

Word-Meaning: - (इन्द्रः) सर्वशक्तिमान् देव ! (कद्रुवः) प्रकृति देवी के इस (सुतम्) विरचित संसार को अन्त में (अपिबत्) पी जाता है। तब (अत्र) यहाँ (सहस्रबाह्वे) सहस्र बाहु=अनन्तकर्मा अनन्त शक्तिधारी उस ईश्वर को (पौंस्यम्) परमबल (अदेदिष्ट) प्रदीप्त होता है ॥२६॥
Connotation: - जब ईश्वर अन्त में इस अनन्त सृष्टि को समेट लेता है, तब अल्पज्ञ जीवों को यह देख आश्चर्य प्रतीत होता है। तब ही उसमें जीव श्रद्धा और भक्ति करता है ॥२६॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

ऋभुक्षणं तुग्यग्यावृधम्

Word-Meaning: - [१] (न) [संप्रत्यर्थे] = अब हम (ऋभुक्षणं) = महान् प्रभु को (वर्तवे) = चुननेवाले हों । प्रकृति की अपेक्षा प्रभु का वरण करनेवाले हों। उस प्रभु का वरण करें जो (उक्थेषु) = स्तोत्रों के होने पर (तृग्र्यावृधम्) = रेतःकणरूप जलों का वर्धन करनेवाले हैं। [२] हम (सौमे सुते) = सोम को सम्पादित होने पर (इन्द्रं) = उस परमैश्वर्यशाली प्रभु के (सचा) = साथ होनेवाले हों। यह प्रभु के साथ होना ही वस्तुत: हमें सोमरक्षण के योग्य बनाता है।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु महान् है, महान् ज्ञानज्योति में निवास करनेवाले हैं। शरीरस्थ रेतःकणों का रक्षण करनेवाले हैं। सोम के रक्षित होने पर ही प्रभु का दर्शन होता है।

SHIV SHANKAR SHARMA

इन्द्रः संहर्त्तास्तीति दर्शयति।

Word-Meaning: - इन्द्रः=सर्वशक्तिमान् देवः। कद्रुवः=कद्रूः प्रकृतिः तस्याः। सुतम्=निष्पादितमिमं संसारम्। अन्ते। अपिबत्=पिबति=संहरति। ततोऽत्र जीवमध्ये। सहस्रबाह्वे=सहस्रबाहोरिन्द्रस्य। पौंस्यम्=वीर्य्यम्। अदेदिष्ट=प्रदीप्यते ॥२६॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - When the soma is distilled and seasoned and the hymns are sung in the yajna, then to win the company and favour of mighty Indra, I adore the mighty lord, a friend and protector of the strength and power of the people.