Go To Mantra
Viewed 313 times

त॒रणिं॑ वो॒ जना॑नां त्र॒दं वाज॑स्य॒ गोम॑तः । स॒मा॒नमु॒ प्र शं॑सिषम् ॥

English Transliteration

taraṇiṁ vo janānāṁ tradaṁ vājasya gomataḥ | samānam u pra śaṁsiṣam ||

Mantra Audio
Pad Path

त॒रणि॑म् । वः॒ । जना॑नाम् । त्र॒दम् । वाज॑स्य । गोऽम॑तः । स॒मा॒नम् । ऊँ॒ इति॑ । प्र । शं॒सि॒ष॒म् ॥ ८.४५.२८

Rigveda » Mandal:8» Sukta:45» Mantra:28 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:47» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:28


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (वृत्रहा) निखिल विघ्नविनाशक इन्द्र देव मनुष्य को (परावति) किसी दूर देश में या गृह पर (या) जो (सना) पुराने या (नवा) नवीन धन (चुच्युवे) देता है (ता) उनको धनस्वामी (संसत्सु) सभाओं में (प्र+वोचत) कह सुनावे ॥२५॥
Connotation: - परमात्मा की कृपा से मनुष्य को जो कुछ प्राप्त हो, उसके लिये ईश्वर को धन्यवाद देवे और सभा में ईश्वरीय कृपा का फल भी सुना दे, ताकि लोगों को विश्वास और प्रेम हो ॥२५॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'तरणि-त्रद-समान' प्रभु का शंसन

Word-Meaning: - [१] मैं प्रभु का (प्रशंसिषम्) = शंसन करता हूँ। उस प्रभु का, जो (वः) = तुम सब (जनानां) = लोगों के (तरणिं) = तारक हैं-विषय-वासनाओं व कष्टों से पार ले जानेवाले हैं। (त्रदं) = शत्रुओं का नाश करनेवाले हैं शत्रुनाश के द्वारा ही वे हमें कष्टों से पार ले जाते हैं । [२] मैं उस प्रभु का शंसन करता हूँ जो (गोमतः वाजस्य) = प्रशस्त इन्द्रियोंवाले बल को (सम् आनं) = [ अन् प्राणने] सम्यक् प्राणित करनेवाले हैं। प्रभु हमारे में प्राणशक्ति का संचार करते हैं- एक-एक इन्द्रिय को सबल बनाते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु हमें कष्टों से तरानेवाले हैं, हमारे शत्रुओं का विनाश करनेवाले हैं और हमारी इन्द्रयों की शक्ति को प्राणित करनेवाले हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - वृत्रहा=निखिलविघ्ननिवारक इन्द्रो देवः। या=यानि। सना=सनातनानि=पुराणानि। नवा=नवीनानि च। परावति=दूरे वा गृहे वा। चुच्युवे=प्रेरयति ददाति। तानि सर्वाणि। संसत्सु=सभासु। स्वामी प्रवोचत=प्रब्रूताम् ॥२५॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - I constantly praise the lord saviour of you, people, and the protector of your earthly wealth, power, progress and freedom.