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बृ॒हन्निदि॒ध्म ए॑षां॒ भूरि॑ श॒स्तं पृ॒थुः स्वरु॑: । येषा॒मिन्द्रो॒ युवा॒ सखा॑ ॥

English Transliteration

bṛhann id idhma eṣām bhūri śastam pṛthuḥ svaruḥ | yeṣām indro yuvā sakhā ||

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Pad Path

बृ॒हन् । इत् । इ॒ध्मः । ए॒षा॒म् । भूरि॑ । श॒स्तम् । पृ॒थु । स्वरुः॑ । येषा॑म् । इन्द्रः॑ । युवा॑ । सखा॑ ॥ ८.४५.२

Rigveda » Mandal:8» Sukta:45» Mantra:2 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:42» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:2


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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (अग्ने) हे सर्वगतदेव ! (हि) जिस कारण तू (धीरः+असि) धीर गम्भीर है, (अद्मसद्) सबके हृदयरूप गृह में निवासी है (न) और (विप्रः) विशेषरूप से मनोरथ पूर्ण करनेवाला है तथा (सदा) सर्वदा (जागृविः) भुवन के हित के लिये जागरणशील है। हे देव ! (द्यवि) प्रकाशमय स्थान में तू (दीदयसि) दीप्यमान हो रहा है, अतः तुझको प्रत्यक्षवत् देखकर मैं गाता हूँ ॥२९॥
Connotation: - हे मनुष्यों ! जो तुम्हारे कल्याण के लिये सदा जागृत है, उसकी आज्ञा में चलो ॥२९॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

इध्मः + शस्तं+स्वरुः

Word-Meaning: - [१] (येषां) = जिनका (इन्द्र:) = शत्रुओं का विद्रावण करनेवाला प्रभु युवा बुराइयों को दूर करनेवाला (सखा) = मित्र होता है, (एषां) = इन उपासकों की (इध्मः) = ज्ञानदीप्ति (इत्) = निश्चय से (बृहन् इत्) = खूब बढ़ी हुई होती हैं, प्रभु की मित्रता में ज्ञान की वृद्धि होती है। [२] इस मित्रता में (शस्तं भूरि) = प्रशस्त कर्म पालन व पोषण करनेवाले होते हैं, अथवा यह खूब प्रशस्त कर्मों को करनेवाला बनता है और (स्वरुः) = [स्वृ उपतापे] इनका शत्रु-संतापन का कार्य (पृथुः) = अतिशयेन विशाल होता है ।
Connotation: - भावार्थ - प्रभु की मित्रता में [क] ज्ञान बढ़ता है, [ख] प्रशस्त कर्म हमारा भरण करते हैं [ग] हम काम-क्रोध आदि को सन्तप्त करके दूर कर पाते हैं।
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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे अग्ने=सर्वगत देव ! हि=यस्माद्धेतोः। त्वं धीरोऽसि। त्वम्। अद्म=सदसि=सर्वेषां हृदयसद्मनिवासी वर्तसे। न चार्थः। पुनः। विप्रः=विशेषेण मनोरथप्रपूरकः। पुनः। सदा जागृविः=भुवनानां हितकरणे जागरूकः। हे देव ! ईदृशस्त्वम्। द्यवि=द्योतनात्मके स्थाने। दीदयसि=दीप्यसे अतस्त्वां स्तौमि ॥२९॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Great is their fuel and fire, profuse their praise and song of adoration, expansive their yajna and high their ensign whose friend is Indra, youthful soul, their ruler and defender.