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यच्छु॑श्रू॒या इ॒मं हवं॑ दु॒र्मर्षं॑ चक्रिया उ॒त । भवे॑रा॒पिर्नो॒ अन्त॑मः ॥
English Transliteration
Mantra Audio
yac chuśrūyā imaṁ havaṁ durmarṣaṁ cakriyā uta | bhaver āpir no antamaḥ ||
Pad Path
यत् । शु॒श्रू॒याः । इ॒मम् । हव॑म् । दुः॒ऽमर्ष॑म् । च॒क्रि॒याः॒ । उ॒त । भवेः॑ । आ॒पिः । नः॒ । अन्त॑मः ॥ ८.४५.१८
Rigveda » Mandal:8» Sukta:45» Mantra:18
| Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:45» Mantra:3
| Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:18
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - हे इन्द्र हे महेश ! आप (तस्य) उस कृपण पुरुष का (वेदः) धन (नः) हमारे लिये (आभर) ले आवें, (यः) जो (रेवान्) धनिक होकर भी (ते) आपके उद्देश से दीन दरिद्र मनुष्यों के मध्य (अदाशुरिः) कुछ नहीं देता, प्रत्युत (मघत्तये) धनदान करने के लिये (प्रममर्ष) अन्यान्य उदार पुरुषों की जो निन्दा किया करता है ॥१५॥
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
दुर्मर्ष बल
Word-Meaning: - [१] हे प्रभो ! आप (यद्) = जब (इमं हवं) = हमारी पुकार को (शुश्रूयाः) = सुनते हैं, (उत) = और (दुर्मर्षम्) = शत्रुओं से न सहने योग्य बल को हमारे लिए (चक्रिया:) = करते हैं, तो (नः) = हमारे (अन्तमः) = अन्तिकतम (आपिः) = मित्र (भवेः) = होते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु हमारे अन्तिकतम मित्र हैं। वे हमें उस बल को प्राप्त कराते हैं, जो शत्रुओं से सहने योग्य नहीं होता ।
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - हे इन्द्र ! ईश ! तस्य=पुरुषस्य। वेदो धनम्। नोऽस्मभ्यम्। आभर=आहर। यः खलु रेवान्=धनवान् भूत्वाऽपि। ते=तव प्रीत्यर्थम्। दीनानां मध्ये। अदाशुरिः=अदाताऽस्ति। पुनः। मघत्तये। धनदानाय। प्रममर्ष=अभ्यसूयति ॥१५॥
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - As you hear this call of ours, take it as unforgettable and be our closest and ultimate friend and brother.
