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क॒कु॒हं चि॑त्त्वा कवे॒ मन्द॑न्तु धृष्ण॒विन्द॑वः । आ त्वा॑ प॒णिं यदीम॑हे ॥

English Transliteration

kakuhaṁ cit tvā kave mandantu dhṛṣṇav indavaḥ | ā tvā paṇiṁ yad īmahe ||

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Pad Path

क॒कु॒हम् । चि॒त् । त्वा॒ । क॒वे॒ । मन्द॑न्तु । धृ॒ष्णो॒ इति॑ । इन्द॑वः । आ । त्वा॒ । प॒णिम् । यत् । ईम॑हे ॥ ८.४५.१४

Rigveda » Mandal:8» Sukta:45» Mantra:14 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:44» Mantra:4 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:14


SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (अद्रिवः) हे महादण्डधर अन्तरात्मन् ! हम उपासक संसार के कार्य में (शनैः चित्) मन्द-मन्द (यान्तः) चलते हुए सुखी होवें (अश्वावन्तः) अश्व, गौ और मेष आदि पशुओं से युक्त होवें तथा (शतग्विनः) शतधनोपेत यथार्थ विविध प्रकार के धनों से युक्त होवें तथा (विवक्षणाः) नित्य नवीन-२ वस्तुओं को प्राप्त करते हुए हम (अनेहसः) उपद्रवरहित होवें ॥११॥
Connotation: - हम अपनी-२ उन्नति धीरे-२ करें। विविध पशुओं को भी पालकर उनसे लाभ उठावें और सदा वैसे आचार और विचार से चलें, जिससे कोई उपद्रव न आवे ॥११॥

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

'ककुहं पणिम्'

Word-Meaning: - [१] हे (कवे) = सर्वज्ञ [क्रान्तप्रज्ञ] (धृष्णो) = शत्रुधर्षक प्रभो ! (ककुहं) = सर्वश्रेष्ठ [शिखर - भूत] (त्वा) = आपको (चित्) = निश्चय से (इन्दवः) = ये सोमकण [सब ऐश्वर्य] (मन्दन्तु) = आनन्दित करते हैं। जब हम सोमकणों का रक्षण करते हैं, तो ये रक्षित सोमकण हमारे जीवन में आपके प्रकाश को बढ़ाते है और इस प्रकार हमें आपका प्रिय बनाते हैं। [२] यह वह समय है (यत्) = जब (पणि) = [पण स्तुतौ] स्तुति के योग्य आपको आ ईमहे सब प्रकार से प्राथत करते हैं। प्रभु से सब उचित साधनों को पाकर हम उन साधनों के सत्प्रयोग से प्रभु को पानेवाले बनते हैं।
Connotation: - भावार्थ- प्रभु की आराधना करते हुए हम सोमरक्षण से प्रभु को प्रसन्न करके सब उचित साधनों को प्राप्त कराने के लिए प्रभु से प्रार्थना करते हैं।

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे अद्रिवः=दण्डधारिन् ! अन्तरात्मन् ! वयम्। संसारकार्ये। शनैः=मन्दं मन्दम्। यान्तः=गच्छतः सुखिनः स्याम। अश्वावन्तः=अश्वगोप्रभृतिपशुमन्तो भवेम। शतग्विनः=शतधनोपेताः। विवक्षणाः=प्रतिदिनमभीष्टं वहन्तः। अनेहसः=उपद्रवरहिताश्च भवेम ॥११॥

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - While we pray to you, generous lord, and ask for what we want, O cosmic poet and visionary, may our yajnas and soma celebrations please you, most high and supreme lord of power, justice and award.