Go To Mantra

प्र॒त्नं होता॑र॒मीड्यं॒ जुष्ट॑म॒ग्निं क॒विक्र॑तुम् । अ॒ध्व॒राणा॑मभि॒श्रिय॑म् ॥

English Transliteration

pratnaṁ hotāram īḍyaṁ juṣṭam agniṁ kavikratum | adhvarāṇām abhiśriyam ||

Mantra Audio
Pad Path

प्र॒त्नम् । होता॑रम् । ईड्य॑म् । जुष्ट॑म् । अ॒ग्निम् । क॒विऽक्र॑तुम् । अ॒ध्व॒राणा॑म् । अ॒भि॒ऽश्रिय॑म् ॥ ८.४४.७

Rigveda » Mandal:8» Sukta:44» Mantra:7 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:37» Mantra:2 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:7


Reads 359 times

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - (दीदिवः) हे समस्त जगत् को स्वतेज से प्रदीप्त करनेहारा (अग्ने) हे सर्वाधार महेश ! (समिधानस्य) सम्यक् सर्वत्र देदीप्यमान (ते) तेरी (बृहन्तः) महान् और (शुक्रासः) शुचि (अर्चयः) सूर्य्यादिरूप दीप्तियाँ (उदीरते) ऊपर-ऊपर फैल रही हैं ॥४॥
Connotation: - ईश्वर सबमें व्यापक होकर स्वतेज से सबको प्रदीप्त कर रहा है। अग्नि और सूर्य्यादिक में उसी की दीप्ति है, पृथिवी में उसकी शक्ति से सर्व वस्तु उत्पन्न हो रही हैं। वायु में उसकी गति है। इस अनन्त ईश्वर की उपासना करो, जिससे हे मनुष्यों ! तुम्हारा कल्याण हो ॥४॥
Reads 359 times

HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

अध्वराणामभिश्रियम्

Word-Meaning: - [१] मैं उस प्रभु का स्तवन करता हूँ जो (प्रत्नं) = सनातन हैं- सदा से हैं, पुराण पुरुष हैं। (होतारं) = सब कुछ देनेवाले हैं। (ईड्यं) = स्तुति के योग्य हैं। (जुष्टं) = प्रीतिपूर्वक सेवित होते हैं। (अग्निम्) = अग्रणी हैं। (कविक्रतुम्) [कविश्चासौ क्रतुञ्च ] = क्रान्तदर्शी व शक्ति के पुञ्ज हैं। [२] उस प्रभु का मैं स्तवन करता हूँ जो (अध्वराणाम् अभिश्रियम्) = हिंसारहित यज्ञात्मक कर्मों के अन्दर निवास करनेवाले हैं। जहाँ यज्ञ हैं, वहीं प्रभु का वास है ।
Connotation: - भावार्थ- हम उस पुराण पुरुष का उपासन करें। वे प्रभु ही सब कुछ देनेवाले, स्तुत्य, सेवनीय, अग्रणी, क्रान्तदर्शी व शक्तिपुञ्ज हैं। प्रभु का निवास वहीं होता है, जहाँ यज्ञों का उपक्रम हो ।
Reads 359 times

SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हे दीदिवः=जगतः स्वभाससा दीपयितः ! हे अग्ने सर्वाधार ईश ! समिधानस्य=सम्यक् सर्वत्र दीप्यमानस्य। ते=तव। बृहन्तः=महान्तः। शुक्रासः=शुक्राः। शुचयः। अर्चयः=सूर्य्यादिरूपा दीप्तयः। उदीरते=ऊर्ध्वं प्रसरन्ति ॥४॥
Reads 359 times

DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - I adore Agni, ancient and eternal, generous giver, worthy of reverence and celebration, loved and worshipped, poetic visionary of holy action and gracious performer of yajnic projects of love and non-violence for corporate development.