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यद॑ग्ने॒ स्याम॒हं त्वं त्वं वा॑ घा॒ स्या अ॒हम् । स्युष्टे॑ स॒त्या इ॒हाशिष॑: ॥

English Transliteration

yad agne syām ahaṁ tvaṁ tvaṁ vā ghā syā aham | syuṣ ṭe satyā ihāśiṣaḥ ||

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Pad Path

यत् । अ॒ग्ने॒ । स्या॒म् । अ॒हम् । त्वम् । त्वम् । वा॒ । घ॒ । स्याः । अ॒हम् । स्युः । ते॒ । स॒त्याः । इ॒ह । आ॒ऽशिषः॑ ॥ ८.४४.२३

Rigveda » Mandal:8» Sukta:44» Mantra:23 | Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:40» Mantra:3 | Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:23


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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - हम उपासकगण (अग्नेः) उस परमात्मा की (सख्यम्) मित्रता को (सदा) सर्वदा (वृणीमहे) चाहते हैं, जो ईश्वर (अदब्धस्य) अविनश्वर और शाश्वत है (स्वधावतः) प्रकृतिधारक है (दूतस्य) निखिलदुःखनिवारक है और (रेभतः) जो महाकवीश्वर है ॥२०॥
Connotation: - हे मनुष्यों ! उस परमात्मा के साथ मित्रता करो, जिससे तुम्हारा परम कल्याण होगा। जो सदा रहनेवाला है ॥२०॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR

तू मैं, मैं तू

Word-Meaning: - [१] (अग्ने) = हे अग्रणी प्रभो ! (यद्) = यदि (अहं) = मैं (त्वं स्याम्) = तू हो जाऊँ, (वा) = और (त्वं) = तू (घा) = निश्चय से (अहं स्याम्) = मैं हो जाऊँ, तो (ते आशिषः) = आपके सब आशीर्वाद (इह) = यहाँ (सत्याः स्युः) = सत्य हो जाएँ। [२] जीवनयात्रा में सर्वोच्च स्थिति यही है कि हम प्रभु से मिल जाएँ। 'मैं प्रभु व प्रभु मैं' हो जाना ही अद्वैत हैं। यही स्थिति पूर्ण निर्भीकता की स्थिति है।
Connotation: - भावार्थ- हम अपने को प्रभु से एक करने का प्रयत्न करें। ऐसा होने पर सब मंगल कामनाएँ पूर्ण हो जाती हैं।
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SHIV SHANKAR SHARMA

Word-Meaning: - वयम्। अग्नेः=परमात्मनः। सख्यं=मैत्रीम्। सदा। वृणीमहे=कामयामहे। कीदृशस्य अदब्धस्य=अहिंसितस्य अविनश्वरस्य। पुनः। स्वधावतः=प्रकृतिमतः= प्रकृतिधारकस्य। पुनः। दूतस्य=निखिलदुःखनिवारकस्य। पुनः। रेभतः=महाकवीश्वरस्य ॥२०॥
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DR. TULSI RAM

Word-Meaning: - Agni, lord of love and life’s bonding, if and when I were you and you were me, then would your love and blessings for me be truly realised.