उद॑ग्ने॒ शुच॑य॒स्तव॑ शु॒क्रा भ्राज॑न्त ईरते । तव॒ ज्योतीं॑ष्य॒र्चय॑: ॥
English Transliteration
Mantra Audio
ud agne śucayas tava śukrā bhrājanta īrate | tava jyotīṁṣy arcayaḥ ||
Pad Path
उत् । अ॒ग्ने॒ । शुच॑यः । तव॑ । शु॒क्राः । भ्राज॑न्तः । ई॒र॒ते॒ । तव॑ । ज्योतीं॑षि । अ॒र्चयः॑ ॥ ८.४४.१७
Rigveda » Mandal:8» Sukta:44» Mantra:17
| Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:39» Mantra:2
| Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:17
Reads 386 times
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - (मित्रमहः) हे मित्रभूत जीवों से सुपूज्य (अग्ने) महेश ! (शुक्रेण) शुद्ध (शोचिषा) तेज से युक्त (सः+त्वम्) वह तू (देवैः) हमारे इन्द्रियों के साथ (नः) हमारे (बर्हिषि) हृदयासन पर (आसत्सि) बैठ ॥१४॥
Connotation: - ईश्वर को हृदय में बैठाकर ध्यान करे और इन्द्रियों को प्रथम वश कर उसकी स्तुति मन से करे ॥१४॥
Footnote: देव−इन्द्रियवाचक देव शब्द है, यह प्रसिद्ध है ॥१४॥
Reads 386 times
HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
ज्ञानज्वाला+तेजस्विता
Word-Meaning: - [१] हे (अग्ने) = अग्रणी प्रभो ! (तव) = आपकी (शुचयः) = पवित्र (शुक्राः) = दीप्त (अर्चयः) = ज्ञान- ज्वालाएँ (भ्राजन्तः) = चमकती हुईं तब (ज्यतेती षि) = तेरी ज्योतियों को तेजस्विताओं को (उदीरते) = उद्गत करती हैं। [२] जब हम प्रभु की उपासना करते हैं, तो हमारे जीवनों में प्रभु की ज्ञानज्योतियाँ व तेजस्विताएँ चमक उठती हैं।
Connotation: - भावार्थ- उपासक के जीवन में प्रभु की पवित्र ज्ञानज्वालाएँ व तेजस्विता में चमक आती हैं।
Reads 386 times
SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - हे मित्रमहः=मित्रैर्जीवैः पूजनीय अग्ने ईश ! शुक्रेण=शुद्धेन। शोचिषा=तेजसा युक्तः। स त्वम्। देवैरस्माकमिन्द्रियैः सह। नोऽस्माकम्। बर्हिषि=हृदयासने। आ सत्सि=आसीद=उपविश ॥१४॥
Reads 386 times
DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - Agni, light and life of the world, your fires and flames, lights and lightnings, pure, white and undefiled, shine and radiate all over spaces.
