विप्रं॒ होता॑रम॒द्रुहं॑ धू॒मके॑तुं वि॒भाव॑सुम् । य॒ज्ञानां॑ के॒तुमी॑महे ॥
English Transliteration
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vipraṁ hotāram adruhaṁ dhūmaketuṁ vibhāvasum | yajñānāṁ ketum īmahe ||
Pad Path
विप्र॑म् । होता॑रम् । अ॒द्रुह॑म् । धू॒मऽके॑तुम् । वि॒भाऽव॑सुम् । य॒ज्ञाना॑म् । के॒तुम् । ई॒म॒हे॒ ॥ ८.४४.१०
Rigveda » Mandal:8» Sukta:44» Mantra:10
| Ashtak:6» Adhyay:3» Varga:37» Mantra:5
| Mandal:8» Anuvak:6» Mantra:10
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SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - मैं उस अग्निवाच्य ईश्वर की स्तुति करता हूँ, जो (प्रत्नम्) पुराण और शाश्वत है (होतारम्) दाता (ईड्यम्) स्तुत्य (जुष्टम्) सेवित (कविक्रतुम्) महाकवीश्वर और (अध्वराणाम्) सकल शुभकर्मों का (अभिश्रियम्) सब तरह से शोभाप्रद है ॥७॥
Connotation: - वही ईश पूज्य है, यह शिक्षा इससे देते हैं ॥७॥
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HARISHARAN SIDDHANTALANKAR
'विप्र-विभावसु' प्रभु
Word-Meaning: - [१] (यज्ञानां) = सब यज्ञों के (केतुं) = प्रकाशक [प्रज्ञापक] प्रभु से (ईमहे) = याचना करते हैं। उस प्रभु से याचना करते हैं, जो (विप्रं) = हमारा विशेषरूप से पूरण करनेवाले हैं। [२] वे प्रभु (होतारं) = सब कुछ देनेवाले हैं। (अद्रुहं) = द्रोहशून्य हैं। (धूमकेतुं) = वासनाओं को प्रकम्पित करनेवाले ज्ञान को देनेवाले हैं। (विभावसुम्) = ज्योतिरूप धनवाले हैं।
Connotation: - भावार्थ-यज्ञों के प्रकाशक प्रभु से हम यही याचना करते हैं, वे हमें शक्ति दें कि हम अपना पूरण करते हुए दानशील, द्रोहशून्य व ज्ञान द्वारा वासनाओं को कम्पित करनेवाले ज्ञानमय बन पाएँ ।
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SHIV SHANKAR SHARMA
Word-Meaning: - अहमग्निमीळे इति पूर्ववाक्येन सम्बन्धः। कीदृशम्। प्रत्नम्=पुराणं शाश्वतम्। होतारं=दातारम्। ईड्यं=स्तुत्यम्। जुष्टं=सर्वसेवितम्। कविक्रतुम्=कविकर्माणम्। पुनः। अध्वराणाम्=सर्वेषां शुभकर्मणामभिश्रियम्=अभितः शोभाप्रदम् ॥७॥
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DR. TULSI RAM
Word-Meaning: - With prayer and adoration we honour and approach Agni, omniscient lord vibrant in existence, giver of fulfilment, free from jealousy, rising in flaming fragrance, universal lord of light, wealth and honour, and symbolic ensign of yajna.
